बिलासपुरः झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा संचालित अस्पतालों में बिना डिग्री के आपरेशन के उपरांत होने बाली मौतों का जिम्मेदार कौन ?
January 06, 2026
बिलासपुर। नगर ही नहीं आस पास के क्षेत्रों में संचालित फर्जी बिना डिग्री के चल रहे अस्पतालों में ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात आशाओं के सांठ गांठ के चलते बिना किसी अनुभव बा डिग्री के धड़ल्ले से किए जा रहे गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन में दिन प्रतिदिन मरने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है क्या कभी किसी ने इस विषय पर गहनता से विचार किया है कि आखिर इन झोलाछाप फर्जी अस्पतालों को संरक्षण देने वाला और अपनी छत्रछाया में संचालित कराने वाला आखिर कौन अधिकारी जिम्मेदार है अगर आप लोग इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे तो आप खुद समझ जाएंगे कि ऐसे अस्पतालों में होने वाली महिलाओं की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन अधिकारी है आओ हम आपको इस विषय में सही और जानकारी देते हैं आपकी समझ में खुद आ जाएगा कि यह बात सही है सोचने का विषय है की जब सरकार ने हर जिले में नोडल अधिकारी इन झोलाछाप डॉक्टर अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैनात किया हुआ है तो यह झोलाछाप व्यक्ति बिना किसी डर खौफ के धड़ल्ले से इंसान के जीवन से खेल रहे हैं इनको संरक्षण किसका प्राप्त है अगर सही मायने में देखा जाए तो इन अस्पतालों में होने वाली मौतों का आखिर जिम्मेदार जिले में तैनात नोडल अधिकारी है जिसको सरकार ने इनफर्जी एवं बिना किसी डिग्री बा एमबीबीएस डॉक्टर के बड़े-बड़े अस्पताल चलाने वाले इंसान के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को संरक्षण देने में नोडल अधिकारी पूरी तरह से मौत का जिम्मेदार है सरकार को चाहिए कि अगर जनहित में इंसानों के जीवन को इन मौत के सौदागरों से बचाना है तो सबसे पहले अगर जिले के किसी भी अस्पताल में डिलीवरी एवं किसी अन्य कारण इन झोलाछापों की लापरवाही से अगर मौत होती है तो उस अस्पताल के संचालित करने वाले के साथ-साथ नोडल अधिकारी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होना चाहिए क्योंकि नोडल अधिकारी वेतन ही इसी बात का लेता है कि वह फर्जी अस्पतालों फर्जी झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ समय-समय पर कार्यवाही करें लेकिन उसका उल्टा हो रहा है की जी अधिकारी को इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंप गई है वह व्यक्ति खुद अपने करिंदों के माध्यम से वेतन के अलावा इन मौत के सौदागरों से प्रति महा अपना सुविधा शुल्क वसूलता देखा जाता है इसीलिए यह लोग बिना किसी डर बा खौफ के गरीब मजदूर व्यक्तियों के जान और माल दोनों से खिलवाड़ करते देखे जाते हैं सरकार को चाहिए की इस पर एक सख्त कानून बनाए और स्पष्ट आदेश पारित किए जाएं कि अगर किसी भी जिले में फर्जी अस्पताल बिना डिग्री बिना एमबीबीएस डॉक्टर के चलता पाया जाता है और उसमें किसी गरीब मजदूर की मौत होती है तो उसे डॉक्टर के साथ-साथ नोडल अधिकारी के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी क्योंकि अपराध करने वाला और अपराधी को संरक्षण देने वाला भी उतना ही दोषी है जितना कि अपराध करने वाला है शेष वार्ता अगले अंक में प्रकाशित की जाएगी।
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