पीलीभीत। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। इस कहावत को साकार कर दिखाया है गजरौला कस्बा निवासी जतिन रस्तोगी ने, जो आज केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ में चयनित होकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती उत्तर-पूर्वी राज्यों में है, जहां वे राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।गजरौला की साधारण पृष्ठभूमि में पले-बढ़े जतिन रस्तोगी ने बचपन से ही देशसेवा का सपना संजोया था। सीमित आर्थिक संसाधनों और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल कर अपने गांव और जनपद का नाम रोशन किया है।जतिन की प्रारंभिक शिक्षा गजरौला कस्बा के एक निजी विद्यालय से कक्षा 8 तक हुई। इसके बाद उन्होंने आदर्श किसान इंटर कॉलेज से वर्ष 2015 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई उन्होंने बीएससी बीसलपुर से पूर्ण की। देशसेवा के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए जतिन ने लगातार तैयारी जारी रखी।नवंबर 2023 में उनका चयन ग्रुप सेंटर सीआरपीएफ रामपुर के माध्यम से हुआ। जतिन ने बताया कि उन्होंने लिखित परीक्षा प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण की। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल) और मेडिकल परीक्षण में भी सफलता प्राप्त कर अंतिम रूप से सीआरपीएफ में चयनित हुए।
जतिन बताते हैं कि कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी मेहनत और अनुशासन से समझौता नहीं किया। वे प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर दौड़ लगाते और पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते थे।परिवार के बारे में जानकारी देते हुए जतिन ने बताया कि उनके पिता उमेश चंद्र इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते थे। परिवार में एक बहन है, जिनका विवाह हो चुका है, जबकि छोटा भाई नितिन वर्तमान में पढ़ाई कर रहा है।जतिन की इस उल्लेखनीय सफलता से गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। परिजनों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए शुभकामनाएं दी हैं। आज जतिन रस्तोगी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
