बाराबंकी । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को मंजीठा स्थित नागदेवता मंदिर के निकट हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( अवध क्षेत्र) के प्रांत प्रचारक कौशल किशोर ने हिंदू सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए समाज, राष्ट्र और परिवार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर पंच परिवर्तन के मायने समझाए।उन्होंने कहा कि डॉक्टर हेडगेवार ने सनातन परंपराओं एवं संस्कृति की रक्षा एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण करने के लिए 1925 में आरएसएस की स्थापना की थी। उन्होंने स्वयंसेवकों को पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम स्वदेशी बोध,नागरिक कर्तव्य,पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक समरसता व कुटुम्ब प्रबोधन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे समाज में सशक्त रूप से लागू किया जाए तो भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी का बोध केवल आर्थिक आत्म निर्भरता का विषय नहीं है। बल्कि यह हमारी संस्कृति,परंपरा और जीवनशैली से जुड़ा हुआ है। नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग होकर ही एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति सुरक्षित रह सके। सामाजिक समरसता से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच व भेद भाव मिटेगा तथा सद्भाव की स्थापना होगी। वहीं कुटुम्ब प्रबोधन भारतीय परिवार व्यवस्था को मजबूत करेगा। जो वर्तमान समय में एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण चुनौती का सामना कर रही है। कहा कि संस्कारों के अभाव में परिवार टूट रहे हैं।उन्होंने कहा कि संगठित होकर ही भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। स्वयंसेवकों एवं हिन्दू समाज का कर्तव्य है कि वे समाज को एकजुट रखें व किसी भी प्रकार की टूट-फूट को रोकें। प्रांत प्रचारक ने जोर देते हुए कहा कि संगठित हिंदू समाज ही समर्थ भारत की नींव है।उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज के जागरण का विराट स्वरूप अब दिखने लगा है। उन्होंने किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति, भाषा, संपत्ति या सामाजिक स्थिति के आधार पर न करने की सलाह दी। उनका कहना था कि यह देश उन सभी का है जो सनातन संस्कृति एवं परंपराओं का सम्मान करता है और यही भावना सच्ची सामाजिक समरसता की पहचान है।उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता की पहली शर्त मन से भेदभाव की भावना को खत्म करना और हर व्यक्ति को अपना समझना है।उन्होंने हिंदू समाज से अपील की कि वे आपसी समझ को बढ़ाएं, संकट के समय एक-दूसरे का सहारा बनें और देश के इतिहास व पूर्वजों को जानने का प्रयास करें। कहा कि हिन्दू समाज में आपसी भेदभाव का फायदा उठाकर विदेशी आक्रांताओं ने एक हजार वर्षों तक भारत पर अत्याचारी शासन किया।अध्यक्षता पूज्य महंत शिवदास ने की।सम्मेलन को प्रांजल दास महाराज एवं अधिवक्ता सुरेश गौतम ने भी बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती एवं समरसता भोज से हुआ।।संचालन आशीष सिंह ने किया। इस अवसर पर जिला प्रचारक रवि प्रकाश , सहजिला कार्यवाह पारितोष,आदित्य ,योगेन्द्र ,अनुज,ऋषिकेश,अंकित, अमन सहित हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
