कुंडा/प्रतापगढ़। योगी सरकार में कुंडा में सक्रिय बेखौफ भूमाफियाओं ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर निर्माण करना शुरू कर दिया। मजे की बात तो यह रही कि सीएचसी अधीक्षक की नाक के नीचे बेखौफ भूमाफिया अस्पताल की जमीन पर कब्जा करके निर्माण करते रहे लेकिन उन्होंने भूमाफियाओं के अवैध निर्माण पर कोई एक्शन ही नही लिया। सरकारी अस्पताल की जमीन पर अवैध कब्जा की खबर जब मीडियाकर्मी द्वारा चलाई गई तो क्षेत्रीय लेखपाल और तहसीलदार ने मौके पर जाकर अवैध कब्जे को रुकवा दिया है।
कुंडा कोतवाली के कुंडा नगर पंचायत में स्थित जमीन,गाटा संख्या 603, रकबा 0.3490 हे. राजस्व अभिलेख में सफाखाना अस्पताल के रूप में दर्ज है।जिस पर पूर्व में महिला अस्पताल चलता था। वर्तमान समय में उस जमीन पर अस्पताल की जर्जर इमारतें अब भी मौजूद हैं।उसी जमीन पर कुंडा इलाके के कुछ भूमाफिया ईट, सीमेंट सरिया ले जाकर अवैध रूप से कब्जा करके निर्माण कार्य कराने लगे। कई दिनों तक अवैध रुप से अस्पताल की जमीन पर निर्माण होता रहा लेकिन निर्माण स्थल से कुछ ही दूर स्थित सीएचसी अधीक्षक को इस बात की जानकारी ही नही लगी, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएचसी अधीक्षक को अवैध रूप से कब्जे की जानकारी थी लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही नही की।अस्पताल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जे को लेकर जब मिडियाबाजी शुरू हो गई तो क्षेत्रीय लेखपाल राम प्रसाद यादव और तहसीलदार मौके पर गए और उन्होंने अवैध रूप से हो रहे निर्माण को रुकवा दिया। लेखपाल ने बताया कि अस्पताल की जमीन पर निर्माण हो रहा था, जिसे रुकवा दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी किसी के खिलाफ कोई भी शिकायत नही की गई है। सीएचसी अधीक्षक डॉ राजीव त्रिपाठी का कहना है कि मामलें की जानकारी होने के बाद उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर अस्पताल के जमीन की पैमाइश कराकर अवैध कब्जा रुकवाने और अतिक्रमण हटवाने की मांग की है लेकिन जिस तरह से सीएचसी अधीक्षक कुंडा डॉ राजीव त्रिपाठी द्वारा मामलें में निष्क्रियता और शिथिलता बरती जा रही है, उससे पूरे मामलें में उनकी भूमिका संदिग्ध लग रही है।
इनका है कहना- अलख शुक्ला, तहसीलदार ने कहा कि अस्पताल की जमीन पर अवैध रूप से हो रहे निर्माण को रुकवा दिया गया गया है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से अवैध कब्जाधारकों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए शिकायत नही की गई है।
करोड़ो रुपए की बेशकीमती अस्पताल की जमीन पर कब्जा करने वाले बेखौफ भूमाफियाओं के रसूख के आगे कोई भी उनका नाम लेने को तैयार नही है। खुद सीएचसी अधीक्षक कुंडा डॉ राजीव त्रिपाठी भी पूरे मामलें में गोलमोल जवाब दें रहें हैं। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत से रसीद कटवाकर अस्पताल की जमीन पर निर्माण किया जा रहा था लेकिन जब उनसे पूछा गया कि अस्पताल की जमीन को जिला पंचायत ने कैसे और किस कानून के तहत किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से निर्माण करने को और उस जमीन को प्रयोग करने का आदेश दे दिया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नही दिया। सबसे बड़ी हैरानी वाली बात तो यह है कि अधीक्षक होते हुए भी उन्होंने अवैध कब्जा करने की शिकायत न तो राजस्व विभाग से की और न ही किसी अवैध कब्जा धारक के खिलाफ स्थानीय पुलिस को कार्यवाही करने के लिए कोई तहरीर दिया। उन्होंने महज सीएमओ को सूचना देने की बात कही जबकि जानकारों का कहना है कि सीएचसी अधीक्षक स्थानीय स्तर पर अपने विभाग का विभागाध्यक्ष होता है और उसको अपने स्तर से अस्पताल की जमीन की सुरक्षा करते हुए दोषियों पर कार्यवाही करने के लिए पुलिस से शिकायत करनी चाहिए। सीएचसी अधीक्षक द्वारा भूमाफियाओं के खिलाफ बरती जा रही नरमी मामलें में सीएचसी अधीक्षक की भूमिका को संदेहात्मक दर्शा रही है। उधर क्षेत्रीय लेखपाल राम प्रसाद यादव ने बताया कि अवैध निर्माण को तो रुकवा दिया गया है लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनी जमीन को संरक्षण करने के लिए कोई शिकायत नही की गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामलें में जिस तरह से निष्क्रियता और शिथिलता बरती जा रही है, उससे साफ लग रहा है कि इन भूमाफियों को स्वास्थ्य विभाग का कहीं न कहीं से संरक्षण प्राप्त है। सीएचसी अधीक्षक की मंशा है कि बिना उनकी किसी भूमिका के मामलें में सारी कार्यवाही प्रशासनिक स्तर से हो लेकिन तहसीलदार कुंडा अलख शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिकायत करने पर ही प्रभावी ढंग से कार्यवाही की जाएगी।
