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अमेठीः डीएम सीडीओ के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों से बदली ग्रामीण महिला की जीवन दिशा! डीएम व सीडीओ के प्रयासों से महिला सशक्तीकरण की प्रेरक मिसाल


अमेठी। जिलाधिकारी संजय चैहान एवं मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत जनपद अमेठी में महिला सशक्तीकरण की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में विकास खंड भेटुआ के ग्राम टिकरी निवासी रेनू, जो बजरंगी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं तथा शक्ति महिला ग्राम संगठन एवं महिला शक्ति प्रेरणा संकुल स्तरीय संघ के अंतर्गत समूह सखी के रूप में कार्यरत हैं, आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण बन चुकी हैं। रेनू की शैक्षिक योग्यता आठवीं कक्षा तक है तथा उनकी आयु 34 वर्ष है। उनके परिवार में पति, सास-ससुर, एक पुत्र एवं एक पुत्री सम्मिलित हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व उनका जीवन आर्थिक अभाव, बेरोजगारी एवं सामाजिक बंधनों से प्रभावित था। परिवार में आय का कोई स्थायी साधन नहीं था तथा महिला होने के कारण सामाजिक सहभागिता भी सीमित थी। ऐसे कठिन समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ना उनके जीवन में परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हुआ। दिनांक 01 अप्रैल 2013 को रेनू ने बजरंगी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर समूह की गतिविधियों को समझा तथा समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर धूपबत्ती निर्माण मशीन क्रय की। इसके पश्चात उन्होंने घर से ही धूपबत्ती निर्माण का कार्य प्रारंभ किया, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त होने लगी। उनके कार्य, नेतृत्व क्षमता एवं सक्रिय सहभागिता को देखते हुए समूह की महिलाओं द्वारा उन्हें समूह सखी के रूप में चयनित किया गया। नवम्बर 2021 में समूह सखी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत वे वर्तमान में अनेक स्वयं सहायता समूहों का मार्गदर्शन कर रही हैं। रेनू द्वारा अपने ग्राम एवं आस-पास के क्षेत्रों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने, बीमा योजनाओं से आच्छादित कराने तथा आजीविका के विविध साधनों से जोड़ने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। उनका समूह ग्राम का सबसे पुराना एवं सक्रिय समूह है, जो महिला सशक्तीकरण एवं सामाजिक जागरूकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावी मंच है। समूह सखी रेनू का उदाहरण यह सिद्ध करता है कि यदि महिलाओं को उचित अवसर, प्रशिक्षण एवं सहयोग मिले, तो वे न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करती हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बनती हैं। वहीं मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आजीविका, नेतृत्व एवं निर्णय क्षमता से जोड़ना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। समूह सखी रेनू द्वारा किया गया कार्य यह दर्शाता है कि आजीविका मिशन सही दिशा में क्रियान्वित होने पर ग्रामीण विकास का सशक्त आधार बनता है। प्रशासन का सतत प्रयास है कि प्रत्येक पात्र महिला को मिशन से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाए। यह प्रेरक उदाहरण स्पष्ट करता है कि संघर्ष, प्रशिक्षण एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकती हैं तथा अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

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