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पीलीभीतः पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में नेपाली हाथियों का कहर! सैकड़ों बीघा फसल तबाह, किसान मुआवजे के लिए बेहाल


पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों में नेपाली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे सीमावर्ती गांवों के किसानों में दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। नेपाल की गौरी फंटा सेंचुरी से आए हाथियों के झुंड ने महुआ, गोयल कॉलोनी, सिरसा सरदाह समेत कई गांवों में भारी तबाही मचाई है। हाथियों ने सैकड़ों बीघा में खड़ी गन्ना, गेहूं, धान, सरसों और मसूर की फसलों को रौंदकर नष्ट कर दिया, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत कुछ ही रातों में बर्बाद हो गई। वन विभाग द्वारा लगातार गश्त और प्रयासों के बावजूद हाथियों के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हाल ही में हाथियों ने महुआ गांव में कहर बरपाते हुए किसान श्रीकृष्णा और प्रेम प्रकाश के खेतों में लगे सिंचाई पंपसेटों को उखाड़ कर पलट दिया और लगभग पचास मीटर तक घसीटते हुए नुकसान पहुंचाया। किसान प्रेम प्रकाश ने बताया कि एक जनवरी से लगातार हाथी उनके खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। एक अन्य किसान गौरीशंकर ने बताया कि फसल नष्ट होने के कारण बच्चों की स्कूल फीस तक भर पाना मुश्किल हो गया है और घर की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है।फसलों के भारी नुकसान की जानकारी मिलने पर बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएफओ भरत कुमार से फोन पर वार्ता की और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों का नुकसान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करनी होगी।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों के साथ खड़ी है और मुआवजे में देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। वन विभाग की ओर से वन दरोगा अमित तिवारी और डिप्टी रेंजर शेर सिंह ने बताया कि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने के लिए विभागीय टीमें लगातार मशालें जलाकर और पटाखों का उपयोग कर रही हैं, ताकि हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा जा सके। बावजूद इसके हाथियों के झुंड बार-बार गांवों की ओर लौट आ रहे हैं और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं। दूसरी ओर किसानों के मुआवजे का मामला राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते अधर में लटका हुआ है। वन विभाग ने फसल नुकसान के सर्वे के लिए दो बार रिमाइंडर भेजे, लेकिन अब तक राजस्व विभाग की ओर से आवश्यक सर्वे पूरा नहीं किया गया है। क्षेत्रीय लेखपाल ज्योति सिंह द्वारा सर्वे में हो रही देरी के कारण दर्जनों किसानों की मुआवजा फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे पीड़ित किसानों में भारी नाराजगी है।हाथियों से प्रभावित किसानों में जगन्नाथ, रमनदीप सिंह, कुलविंदर कौर, हल्द्वारी लाल, लाल बहादुर सहित दर्जनों किसान शामिल हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है। ये किसान अब शासन और प्रशासन से जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने और हाथियों के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भयावह हो सकते हैं। ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की मेहनत और जीवन सुरक्षित रह सके।

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