सुल्तानपुर। जनपद के बहुचर्चित गनपत सहाय पीजी कॉलेज प्राचार्य हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाए आरोपी अनिल मिश्र ने खुद को बेगुनाह बताते हुए आत्महत्या कर ली। सोमवार को उनका शव कोतवाली नगर क्षेत्र के रामलीला मैदान स्थित एक विद्यालय परिसर से बरामद हुआ। घटना से जिले में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि आत्महत्या से पहले अनिल मिश्र ने ढाई पन्नों का सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया और न्याय न मिलने का दर्द बयां किया है। सुसाइड नोट में आरोपी ने अपने जीवन के संघर्ष, बेरोजगारी, सामाजिक तिरस्कार और पारिवारिक जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए लिखा कि वह लंबे समय से मानसिक दबाव में था।
सुसाइड नोट में अनिल मिश्र ने लिखा कि वह तीन साल तक नौकरी की तलाश में भटकता रहा। उसका मकसद सिर्फ इतना था कि किसी तरह आमदनी हो जाए और वह अपने बच्चों की बेहतर परवरिश कर सके। उसने बच्चों को नसीहत दी कि बुरे वक्त में माता-पिता के अलावा कोई साथ नहीं देता, इसलिए किसी के बहकावे में न आएं।
अनिल मिश्र ने अपने बेटे और बेटियों से पढ़ाई पर ध्यान देने और जीवन में आगे बढ़ने की बात लिखी। उसने लिखा कि अब उनकी मां ही उनके लिए मां और पिता दोनों हैं, इसलिए उसका सहारा बनें। साथ ही यह भी कहा कि बच्चों को उसकी कमी महसूस न हो, इसका ध्यान रखा जाए।
गौरतलब है कि 23 दिसंबर 2011 को गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रताप बहादुर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त वह अपने अंगरक्षक के साथ परीक्षा ड्यूटी पर थे। इस मामले में पुलिस ने सुनियोजित हत्या मानते हुए जांच की थी।
करीब दस साल चली सुनवाई के बाद अक्टूबर 2021 में सुल्तानपुर की निचली अदालत ने पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिनमें अनिल मिश्र भी शामिल था। इसके साथ ही सभी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
सजा के खिलाफ 2022 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अपील लंबित रहने तक कुछ दोषियों को जमानत दी गई थी। अनिल मिश्र भी जमानत पर बाहर था, लेकिन लगातार मानसिक दबाव में रहने की बात सामने आ रही है।
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