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अमेठीः सुनो सरकार! मनरेगा में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में फेल हुए अधिकारी


शैलेन्द्र प्रताप सिंह

अमेठी। भेटुआ ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों मे मनरेगा कार्य के अंतर्गत भ्रष्टाचार चरम पर है  वैसे तो शासन द्वारा मनरेगा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ग्राम रोजगार सेवक से लेकर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी,टेक्निकल असिस्टेंट,एपीओ मनरेगा,वीडियो, लोकपाल मनरेगा तथा डिप्टी कलेक्टर मनरेगा तक के अधिकारियों को सरकार द्वारा भारी भरकम वेतन दिया जाता है जिससे समय-समय पर अधिकारियों द्वारा मनरेगा के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके  परंतु अमेठी जनपद में हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी व्यवस्था भी है परंतु उसमें कहीं भी फर्जी हाजिरी लगाने का कोई जिक्र नहीं है अगर बात की जाए अमेठी जनपद के भेटुआ ब्लॉक की तो कुछ दिन पूर्व मनरेगा आयुक्त के निर्देश पर भेटुआ के अमेयमाफी ग्राम पंचायत में फर्जी हाजिरी के मामले में तत्कालीन वीडियो आकांक्षा सिंह द्वारा रिकवरी का आदेश  भी जारी किया गया था परंतु भेटुआ ब्लॉक में स्थित 47 ग्राम पंचायतो में कुछ ग्राम पंचायत की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है जिसमें प्रमुख रूप से कड़ेरगांव, सनहा,अरसहनी,सरैया मोहन आदि ग्राम सभा में अभी भी कई मास्टर रोल में एक ही मजदूर की फोटो अपलोड कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है जबकि ब्लॉक के अधिकारियों से लेकर ग्राम प्रधानों तक का रवैया साफ एवं स्पष्ट है की किसी तरह से मनरेगा में धन उगाही करके पैसे प्राप्त करने का लक्ष्य स्पस्ट है।  निश्चित रूप से अगर कहा जाए तो इस समय मनरेगा योजना ग्राम पंचायत में दुधारू नस्ल की उच्च क्वालिटी की गाय बना हुआ है।

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