छिबरामऊ /कन्नौज। जन्मदिन को केक और मोमबत्तियों से अलग, सेवा और संकल्प में बदलते हुए आज लडैता गौशाला में एक भावनात्मक और प्रेरक दृश्य देखने को मिला। गौ सेवक रंजीत पांडेय के बड़े बेटे स्वर्गीय गौ सेवक प्रणव पांडेय की स्मृति में आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में गौ माता के प्रति करुणा, समर्पण और मानवता का संदेश दिया गया।स्वर्गीय गौ सेवक प्रणव पांडेय पूर्व में भी नियमित रूप से लडैता गौशाला जाते थे और गौ सेवा में सक्रिय रहते थे।
कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय सेवाभावी के छोटे भाई गौ सेवक कृष्णा पांडेय द्वारा किया गया। इस अवसर पर गौशाला में गायों को केला, गुड़ और गजक खिलाई गई। आयोजन का उद्देश्य जन्मदिन को उत्सव के बजाय सेवा-दिवस के रूप में मनाते हुए, गौ माता के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को समाज तक पहुंचाना रहा।
आयोजकों ने बताया कि बताया कि गौ सेवक प्रणव पांडेय का मानना था कि “गौ सेवा सिर्फ धर्म नहीं, मानवता की सबसे बड़ी पूजा है।” आज उसी विचार को आगे बढ़ाते हुए गौ सेवा के कार्य को निरंतर विस्तार दिया जा रहा है। आयोजक ने भावुक शब्दों में कहा कि भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका प्रेम, उनकी सोच और गौ माता के प्रति करुणा हर कदम पर मार्गदर्शन करती है।कार्यक्रम में छिबरामऊ विकास खंड की लडैता गौशाला में बड़ी संख्या में गौ सेवकों ने सहभागिता की। उपस्थित सेवकों ने संकल्प लिया कि गौ माता की सेवा केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि सतत आंदोलन बनेगा।इस सेवा कार्य में प्रमुख रूप से सेवाभावी के पिता गौ सेवक रंजीत पांडेय (राष्ट्रीय संयोजक, अंतर्राष्ट्रीय हिंदू शक्ति सेना गौ रक्षा प्रकल्प), अंशुल राठौर, रामकिशोर दुबे, पप्पू चैहान, अंशु सक्सेना (जिला संयोजक), दिव्यांशु सक्सेना, सनी सक्सेना, अरुण राजपूत, जय पंडित, धीरू कुमार, गौरव कुमार, कृष्ण ठाकुर, सानू राठौर एवं देव कुमार सहित अन्य गौ सेवक उपस्थित रहे।सेवा कार्यक्रम के दौरान गौशाला परिसर में श्रद्धा और शांति का वातावरण रहा। उपस्थित लोगों ने इसे स्वर्गीय सेवाभावी को सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि जन्मदिन को सेवा-संकल्प में बदलना समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि गौ सेवा को निरंतर, संगठित और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि स्वर्गीय सेवाभावी का अधूरा सपना पूर्ण हो सके।
