लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार की शाम नगर निगम लालबाग में महापौर व पार्षदों के बीच हो रहे सदन की चर्चा में विषय रहा अतिक्रमण और अतिक्रमण भी सिर्फ जोन एक और जोन 4 से संबंधित था। पर क्या यह अतिक्रमण विकास से जुड़े मुद्दे में आता है...?
बात जब आती है स्मार्ट सिटी लखनऊ की, तो प्राथमिकता बनती है कि क्षेत्र में किस तरह का विकास और कैसा विकास हो रहा है?, पर जब सदन में चर्चा हुई तो अतिक्रमण पर हुई। महापौर और पार्षद के हमले में पिस रहे थे नगर निगम के उच्च अधिकारी। क्यों नहीं संबंधित मामले में पुलिस विभाग और यातायात विभाग को शामिल किया गया...?
मंगलवार को सदन में महापौर और पार्षद अतिक्रमण को लेकर गंभीर आरोप नगर निगम पर लगा रहे थे, पर जब बात करें साफ सफाई और सड़क पर हो रहे विकास व सौंदर्यीकरण की, तो इस विषय में कोई भी चर्चा सदन की बैठक में नहीं हुई। ऐसे गंभीर विषयों पर चर्चा होना अति आवश्यक था, पर फिलहाल पार्षद और महापौर के बीच सिर्फ अतिक्रमण ही गपशप का विषय था और निशाने पर था नगर निगम...!
हैरत की बात है यह थी कि सदन में अतिक्रमण पर चर्चा हो रही थी और इस अतिक्रमण में सदन की बैठक के बाद महापौर का काफिला, खुद शर्मा चाय लालबाग के पास फस गया। सोचिए नगर निगम लालबाग के आसपास अतिक्रमण हटाने में यदि सिर्फ नगर निगम को दोष दिया जाए, तो यह गलत है। वो इसलिए क्योंकि इसमें स्थानीय पुलिस और यातायात पुलिस भी उतनी ही जिम्मेदार है...!
पार्षदों द्वारा अतिक्रमण पर चर्चा उठाई गई, महापौर नगर निगम के उच्च अधिकारियों से सवाल पूछ रहीं थीं और आरोप लग रहे थे। पर जब ऐसा मुद्दा था तो पुलिस विभाग और यातायात विभाग को भी निमंत्रण देना चाहिए था। ताकि शहर में अतिक्रमण से हो रहे हनी की भी जानकारी बैठक में सामने आती। पर विषय अतिक्रमण महापौर और पार्षद द्वारा आरोप और सवाल के बीच ही पिस रहा था, पर क्या इसका निवारण सिर्फ नगर निगम ही कर सकता है...?
हल निकालने के लिए महापौर ने सिर्फ नगर निगम को ही दोषी बनाया और सवाल के घेरे में खड़ा कर दिया। पर क्या महापौर की नजर में स्थानीय पुलिस और शहर की यातायात पुलिस अतिक्रमण का जिम्मेदार नहीं है...?
बात करें स्मार्ट सिटी लखनऊ की, तो कैसा विकास हो रहा है, कहां हो रहा है और क्यों नहीं हो रहा है?, ऐसे विषयों पर सदन की बैठक जरूरी थी, पर इस जरूरी विषय को दरकिनार करते हुए सिर्फ निशाना बना अतिक्रमण। जिसमें नगर निगम के जिम्मेदार अपने जवाब में आश्वासन और दिलासे के अलावा कुछ नहीं दे सकते थे। क्योंकि जब लालबाग नगर निगम के आसपास ही इतना अतिक्रमण है, तो बाकी क्षेत्रों की क्या बात की जा सकती है?, वैसे भी एक मुख्य कारण में वीआईपी भी आते हैं। पर सवाल जब नगर निगम से पूछा जा रहा था, तो विषय विकास से संबंधित होना चाहिए था और क्षेत्रीय पार्षदों से भी पूछा जाना चाहिए था...
