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अमेठी: सांसद के०एल० शर्मा का मोदी सरकार पर हमला,बोले-मनरेगा कोई साधारण सरकारी योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण गरीबों के सम्मान


गौरीगंज/अमेठी!  सांसद किशोरी लाल शर्मा ने कल केंद्रीय कांग्रेस कार्यालय, गौरीगंज स्थित राजीव गांधी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में मनरेगा को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा और भावनात्मक हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा कोई साधारण सरकारी योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण गरीबों के सम्मान, अधिकार और जीविका की संवैधानिक गारंटी है, जिसे यूपीए सरकार ने देश के अंतिम व्यक्ति को सशक्त करने के उद्देश्य से लागू किया था।

सांसद ने कहा कि यूपीए शासनकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व, यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी की दूरदर्शी सोच और संकल्प, तथा राहुल गांधी जी के जमीनी संघर्ष के परिणामस्वरूप मनरेगा को “काम का अधिकार” का रूप मिला। डॉ. मनमोहन सिंह जी ने इसे नीतिगत मजबूती दी, सोनिया गांधी जी ने सामाजिक न्याय के संकल्प के साथ इसे आगे बढ़ाया और राहुल गांधी जी ने गांव-गांव जाकर मजदूरों की पीड़ा को समझते हुए महिलाओं, मजदूरों,किसानों के लिए संघर्ष कर योजना क़ी पारदर्शिता और गरीबों क़ी आजीविका का सशक्त आधार बनाया।

उन्होंने कहा कि मनरेगा के लागू होने से गांवों से पलायन रुका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और गरीब परिवारों को आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला। यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की मजबूत दीवार बनकर उभरी।

माननीय किशोरी लाल शर्मा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही मनरेगा की आत्मा पर सीधा प्रहार किया। काम की उपलब्धता घटा दी गई, मजदूरी भुगतान में देरी को सामान्य बना दिया गया और ग्राम पंचायतों के अधिकार कमजोर कर दिए गए। जहां पहले 100 दिन के काम की गारंटी थी, आज मजदूर काम मांगने पर भी निराश लौट रहा है। न्यूनतम मजदूरी का अधिकार कागजों तक सीमित हो गया है और केंद्र सरकार राज्यों पर आर्थिक बोझ डालकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है।

उन्होंने कहा कि “मोदी ने क्या बदला?”—तो जवाब साफ है: अधिकारों की जगह अनिश्चितता, गारंटी की जगह मजबूरी और जवाबदेही की जगह प्रचार। कांग्रेस पार्टी मनरेगा को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत देखना चाहती है। हमारी मांग है कि काम की गारंटी, मजदूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी बहाल की जाए, लंबित भुगतानों का तत्काल भुगतान हो और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए।

सांसद ने यह भी कहा कि मनरेगा के नाम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को मिटाने या उनकी सोच को कमजोर करने की कोशिश उनके विचारों और बलिदान का अपमान है। गांधी जी का सपना अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान का था और मनरेगा उसी गांधीवादी दर्शन की जीवंत अभिव्यक्ति है। इसे कमजोर करना गरीब भारत की आत्मा को चोट पहुँचाने जैसा है।

अंत में उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा को बचाने और मजबूत करने की लड़ाई सड़क से संसद तक पूरी ताकत से लड़ेगी, क्योंकि यह लड़ाई गरीब, मजदूर, गांव और देश के भविष्य की लड़ाई है।

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