लखनऊ: 77वें गणतंत्र दिवस पर कच्छ के रण में दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे का ऐतिहासिक प्रदर्शन! देशभर के लाखों खादी कारीगरों ने वीडियो संदेशों के माध्यम से तिरंगे को सलामी देकर रचा नया कीर्तिमान
January 28, 2026
लखनऊ। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर गुजरात के सीमावर्ती भुज जिले के ‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’ स्थित धोरडो में देशभक्ति और स्वदेशी भावना का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दुनिया के सबसे विशाल खादी से निर्मित राष्ट्रीय ध्वज का भव्य एवं दिव्य प्रदर्शन किया गया।सफेद नमक के रेगिस्तान के विस्तृत मैदान पर लहराता यह विशाल तिरंगा राष्ट्रभक्ति, स्वदेशी चेतना और भारत की सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रतीक बना। देशभर के लाखों खादी कारीगरों ने वीडियो संदेशों के माध्यम से इस ऐतिहासिक तिरंगे को सलामी देकर एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया।इस अवसर पर भारतीय सेना एवं सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने विश्व के इस सबसे विशाल खादी तिरंगे को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ सलामी दी। कार्यक्रम के दौरान भावुक क्षण तब देखने को मिला जब केवीआईसी अध्यक्ष ने मंच से भारतीय सेना के वीर शहीद सार्जेंट मुरलीधर की पत्नी श्रीमती राजकुमारी को सम्मानित कर उनके त्याग, बलिदान और राष्ट्रसेवा को नमन किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार रहे। समारोह में भारतीय सेना एवं बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गुजरात सरकार तथा केवीआईसी के वरिष्ठ अधिकारी एवं खादी कारीगर उपस्थित रहे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत गुजरात के कारीगरों को आधुनिक उपकरण एवं टूलकिट का वितरण भी किया गया।इस अवसर पर केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर कच्छ के रण में दुनिया के सबसे विशाल खादी तिरंगे का प्रदर्शन राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। यह कार्यक्रम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीर जवानों को समर्पित है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रेरणादायी नेतृत्व को देता हूँ, जिनके मार्गदर्शन में खादी आंदोलन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का सुरक्षित, सुव्यवस्थित और विकसित भुज उनके नेतृत्व का परिणाम है। भुज को आत्मनिर्भर और नियोजित नगर के रूप में विकसित किया गया है। सीमा क्षेत्र के निकट स्थित यह शहर आज देश की सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक बन चुका है।यह स्मारकीय राष्ट्रीय तिरंगा भारतीयता की सामूहिक भावना और खादी की विरासत शिल्पकला का प्रतीक है। इस ध्वज को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अवसर पर केवीआईसी द्वारा तैयार किया गया था। यह ध्वज 225 फीट लंबा, 150 फीट चैड़ा तथा लगभग 1400 किलोग्राम वजनी है। इसे तैयार करने में 70 खादी कारीगरों को 49 दिन लगे और लगभग 3500 घंटे का श्रम किया गया। ध्वज में 4500 मीटर हाथ से काते और बुने हुए खादी कॉटन कपड़े का उपयोग हुआ है, जो 33,750 वर्ग फुट क्षेत्रफल को कवर करता है। अशोक चक्र का व्यास 30 फीट है।‘ग्रेट रन ऑफ कच्छ’ जैसे विशिष्ट स्थल पर इस विशाल तिरंगे का प्रदर्शन देशभर के नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत बना और खादी के गौरवशाली अतीत तथा उज्ज्वल भविष्य को रेखांकित करता है।
