16 जनवरी को रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का उपवास, यहां पढ़ें व्रत संपूर्ण कथा
January 15, 2026
मासिक शिवरात्रि का व्रत 16 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखने से और रात्रि के समय शिव पूजन करने से आपको सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही अंत समय में भक्तों को शिवलोक प्राप्त होता है। हालांकि, मासिक शिवरात्रि के व्रत के साथ ही आपको मासिक शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। आज हम आपको इसी कथा के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।
मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा का वर्णन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। कथा के अनुसार, प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था जो जंगल में शिकार करके ही अपना परिवार का भरण-पोषण करता था। हालांकि, चित्रभानु नगर के एक साहुकार का कर्जदार था और आर्थिक परेशानियां उसके जीवन में चलती रहती थीं। जब लंबे समय तक चित्रभानु साहुकार का कर्ज नहीं चुका पाया तो एक दिन साहुकार ने उसे शिवमठ में बंदी बना दिया। जिस दिन उसे बंदी बनाया गया उसी दिन संयोगवश मासिक शिवरात्रि भी थी। मासिक शिवरात्रि के कारण शिवमठ में भजन कीर्तन और शिव उपासना हो रही थी, चूंकि शिकारी बंदी था तो उसने दिन भर शिव भजन और कथा सुनी। इसके बाद साहुकार ने शिकारी को कुछ समय बंदी बनाने के बाद उसे खोलकर अपने पास बुलाया और उधार चुकाने को कहा। इस पर चित्रभानु ने अगले दिन तक ऋण चुकाने की बात कही और यह वादा करके वो चला गया।
सेठ की कैद से छूटकर शिकारी सीधे शिकार पर जंगल की ओर निकल गया। लेकिन लंबे समय तक वो बंदी था इसलिए भूखा प्यास से वो तड़प रहा था। शिकार की तलाश में वो भटकता रहा लेकिन सफलता उसके हाथ न लगी और सूर्यास्त का समय भी नजदीक आ गया। सूर्यास्त के समय वो एक तालाब के पास पहुंचा जहां उसने जल पिया और सुस्ताने के लिए एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थित था जो बेलपत्र से ढका हुआ था। पेड़ पर बैठे-बैठे शिकारी बेलपत्र तोड़ता रहा और संयोगवश वो बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर गिरते रहे। पूरे दिन भर खाना न खाने के कारण शिकारी का व्रत भी हो गया था और रात्रि के पहले पहर में शिवलिंग पर वो बेलपत्र डाल रहा था इसलिए उसके रात्रि के पहले पहर की पूजा भी हो गई।
कुछ वक्त बाद तालाब के किनारे एक हिरणी आई जिसे देखकर चित्रभानु प्रसन्न हुआ और उसका शिकार करने के लिए चित्रभानु ने धनुष पर तीर चढ़ा दिया। यह देखकर हिरणी ने कहा कि वो गर्भवती है इसलिए उसका शिकार न करे। हिरणी ने शिकारी से वादा किया कि प्रसव करने के बाद वो शिकारी के पास लौटेगी। शिकारी के मन में दया का भाव जाग गया और उसने धनुष नीचे कर दिया। कुछ समय के बाद एक दूसरी हिरणी झाड़ियों से निकली तो चित्रभानु प्रसन्न हो गया और उसने फिर से धनुष में बाण चढ़ा दिया, यह देखकर उस हिरणी ने कहा कि वो अपने पति की तलाश में वो उसे न मारे। हिरणी ने कहा कि एक बार मैं अपने पति से मिल लूं फिर स्वयं तुम्हारे पास आ जाऊंगी, चित्रभानु का दिल पिघल गया और उसने हिरणी को जाने दिया। जब उसने धनुष पर बाण चढ़ाया और बाद में वापस उसे खींच लिया, इस दौरान कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए और रात्रि के दूसरे पहर की पूजा भी संपन्न हो गई।
इसके बाद एक और हिरणी अपने बच्चों के साथ तालाब के निकट आई। चित्रभानु ने फिर धनुष में बाण चढ़ाया यह देखकर हिरणी बोली कि आप मुझे अभी मत मारो मैं अपने बच्चों को इनके पिता के पास छोड़कर आ जाऊं उसके बाद जब मैं वापस लौट जाऊंगी तो आप मेरा शिकार कर सकते हैं। इस पर चित्रभानु हंसने लगा और बोला कि मैं मूर्ख नहीं हूं, पहले भी दो बार शिकार छोड़ चुका हूं अबकी बार नहीं छोड़ूंगा। तब हिरणी बोली की जिस तरह आपको अपने बच्चों की चिंता है और उनके लिए आप रात्रि में भी कार्य कर रहे हैं उनसे तरह मुझे भी अपने बच्चों की चिंता है। यह बात सुनकर शिकारी का मन भावुक हो गया और उसने हिरणी को छोड़ दिया।
इसके बाद एक मृग (हिरन) शिकारी को दिखा और इसे मारने के लिए शिकारी व्याकुल हो गया। तब हिरण बोला कि हे शिकारी अगर आपने मेरी तीनों पत्नियों और बच्चों को मार दिया है तो आप मुझे भी मार दें। लेकिन अगर आपने उन्हें नहीं मारा है तो एक बार आप मुझे उनसे मिलने दें नहीं तो वो सब वियोग में मर जाएंगे। हिरण ने वादा किया कि अपने परिवार से मिलने के बाद वो वापस शिकारी के पास आ जाएगा। हिरन की बात सुनकर एक बार फिर शिकारी ने धनुष पर चढ़ाए बाण को वापस खींच लिया और इस दौरान कुछ बेलपत्र फिर से शिवलिंग पर गिर गए और रात्रि के अंतिम प्रहर की पूजा भी अनजाने में शिकारी ने पूरी कर दी।
कुछ वक्त बाद हिरन अपने पूरे परिवार के साथ शिकारी के पास जा पहुंचा। उसने और उसकी पत्नियों ने अपना वादा निभाया। जंगल के पशुओं की निष्ठा और वचनबद्धता देखकर चित्रभानु का मन बदल गया। अगले दिन वो नगर वापस लौटा और किसी व्यक्ति से कर्ज लेकर साहुकार का कर्ज चुका दिया। इसके बाद वो मेहनत करने लगा और शिव जी की कृपा से धीरे-धीरे उसका परिवार धन-धान्य से संपन्न हो गया। अंत समय में जब यमदूत उसे लेने आए तो शिवगणों ने उन्हें भगा दिया और चित्रभानु को शिवलोक ले गए। कथा का सार यह है कि अगर आप अनजाने में भी शिव भगवान की आराधना करते हैं और मासिक शिवरात्रि की कथा का पाठ करते हैं या सुनते हैं तो आपको संपन्नता के साथ ही अंत समय में शिवलोक की प्राप्ति होती है।
