पीलीभीत। शुक्रवार को जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव द्वारा किसान सहकारी चीनी मिल, पूरनपुर में गन्ना पर्वेक्षकों के साथ समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मुख्य गन्ना अधिकारी एवं ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक पूरनपुर भी उपस्थित रहे।बैठक के दौरान जिला गन्ना अधिकारी ने सभी गन्ना पर्वेक्षकों को आगामी बसंत कालीन गन्ना बुवाई की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए।जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि गन्ना विकास विभाग द्वारा गन्ना किस्मों की पहचान से संबंधित विवादों की रोकथाम एवं सर्वे कार्य की गुणवत्ता में सुधार हेतु एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जनपद के समस्त गन्ना पर्वेक्षकों को 15 जनवरी से 20 जनवरी तक गन्ना किस्मों की पहचान हेतु विधिवत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण गन्ना विकास विभाग एवं संबंधित चीनी मिलों के प्रशिक्षित ट्रैनर्स द्वारा चीनी मिल स्तर पर आयोजित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि वर्तमान में गन्ना पेराई सत्र संचालित है और सर्वे के समय खेतों में खड़ी गन्ना फसल छोटी अवस्था में होने के कारण किस्म की स्पष्ट पहचान संभव नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में किसान से पूछताछ के आधार पर किस्म दर्ज की जाती है, लेकिन पेराई के समय चीनी मिल पर लाई गई फसल में किस्म भिन्न पाए जाने से विवाद उत्पन्न हो जाता है।इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सभी गन्ना पर्वेक्षकों का गन्ना किस्मों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहचान में दक्ष होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से माननीय गन्ना आयुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा सभी जिला गन्ना अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जनपदों में निर्धारित अवधि में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सुनिश्चित करें।प्रशिक्षण के उपरांत 20 जनवरी से 05 फरवरी 2026 तक खेतों में खड़ी गन्ना फसल का विस्तृत एवं सटीक सर्वे कराया जाएगा। इससे आगामी वर्ष की पेड़ी गन्ना फसल में किस्म को लेकर होने वाले विवाद समाप्त होंगे तथा किसानों और चीनी मिलों के बीच पारदर्शिता व विश्वास को मजबूती मिलेगी।इस अवसर पर अमित चतुर्वेदी (मुख्य गन्ना अधिकारी), संजय श्रीवास्तव (ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, पूरनपुर) सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने कहा कि “गन्ना किस्मों की सही पहचान से किसानों और चीनी मिलों के बीच होने वाले विवाद पूरी तरह समाप्त होंगे। यह प्रशिक्षण गन्ना सर्वे प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।”
