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Sonebhadra: 14-सूत्री माग को लेकर आशाकर्मियों की हड़ताल जारी कलेक्ट्रेट पर पहुची महिलाएं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपी।

मिशन निदेशालय की मनमानी और सरकार की अनदेखी के कारण आशा कर्मियों को हड़ताल के लिए विवश होना पड़ा।

सोनभद्र। प्रदेश में अपनी सेवाएं दे रही आशा और आशा संगिनी बहुत कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। कई स्तरों पर आवाज उठाने के बावजूद उनके ही पारिश्रमिक की अदायगी करने के बजाय निरंतर अनसुना किया गया। गौर तलब है कि प्रदेश में आशा और संगिनी वर्षों से राज्य और केंद्र के अनेक कार्यों की घोषित प्रोत्साहन राशियों से वंचित है और सरकारों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की वादाखिलाफी की शिकार हैं। 2019 से लम्बित भुगतानो की अदायगी के सम्बन्ध में पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से प्रदेश की आशा और संगिनी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रही हैं। किंतु उनकी आवाज को सुनना भी उचित नहीं समझा गया। प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी लोकहिताय योजना आरोग्य भारत के सपने को साकार करने में गोल्डन आयुष्मान कार्ड आभा आई डी बनाने में किए गए वर्षों से अब तक किए गए योगदान के रु 225 करोड़ में एक रुपए भी नहीं दिया गया । शायद आशा और संगिनी के साथ इन दोनों कार्यों के लिए आपके मातहतों द्वारा की गई क्रूरता और उत्पीड़न याद नहीं होगा। विगत 6 अक्टूबर 2025 को दिए गए ज्ञापन में और उसके बाद स्वास्थ्य मंत्री को दिए गए मांग पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि संपूर्णता में मांगों के समाधान की याचना की गई थी किंतु सरकार द्वारा त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने में कोई रुचि दिखाई गई। मिशन निदेशालय की मनमानी और सरकार की अनदेखी के कारण आशा कर्मियों को हड़ताल के लिए विवश होना पड़ा।आशा, आशा संगिनी को मानद स्वयंसेवक के बजाय 45 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुरूप सरकारी कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया जाय तथा प्रोत्साहन राशि के बजाय न्यूनतम वेतन लागू किया जाए।आशा, आशा संगिनी 'को ईपीएफ, ईएसआई का सदस्य बनाया जाए। सेवा निवृत्ति पर सेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। 10 लाख स्वास्थ्य बीमा और 50 साठा कर जीवन बीमा सुनिश्चित किया जाए। बेहतर कार्य दशा उपलब्ध कराते हुए कार्य की सीमा तय की जाए। एक ही दिन में कई कई तरह के कार्यों के संपादन और जीवन निर्वाह लायक पारिश्रमिक नहीं मिलने के कारण इनका एक विशाल हिस्सा अवसाद से गुजर रहा है। न्यूनतम वेतन लागू होने तक आशा कर्मियों को आधारभूत मानदेय 21000 / तथा आशा संगिनी को रु 28000 / किया जाए। जननी सुरक्षा से जुड़े बुनियादी कार्य के अलावा अन्य कार्यों की उत्प्रेरण राशियों का निर्धारण कर नियमित और पारदर्शी ढंग से भुगतान किया जाए। इस कार्यक्रम में अध्यक्ष तारा देवी,निरी,संगीता,मीना देवी,राधिका,शांति,कुसुम देवी,चंचला देवी,जानकी देवी,जीवना बेगम,सुमित्रा,गीता,सविता समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

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