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बाराबंकी: भागवत कथा के पांचवें दिन गणेश जन्म की कथा का प्रसंग


मसौली/बाराबंकी। कस्बा मसौली स्थित बाजार में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा शिव महापुराण के पांचवें दिन कथा व्यास परमपूज्य शशीकांत महाराज ने गणेश जन्म की पावन कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।कथा व्यास ने बताया कि माता पार्वती ने स्नान के लिए जाते समय अपने उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए, जिससे गणेश जी का जन्म हुआ। स्नान के दौरान पहरेदारी के लिए माता पार्वती ने गणेश जी को द्वार पर खड़े रहने का आदेश दिया और कहा कि उनकी आज्ञा के बिना कोई भी अंदर न आए। इसी बीच भगवान शिव वहां पहुंचे और भीतर जाने लगे, लेकिन माता की आज्ञा का पालन करते हुए गणेश जी ने उन्हें रोक दिया।

इस पर भगवान शिव क्रोधित हो गए और अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया। जब यह समाचार माता पार्वती को मिला तो वे अत्यंत व्याकुल हो गईं। तब भगवान शिव ने उन्हें शांत करते हुए उत्तर दिशा में गए पहले प्राणी का सिर लाने का आदेश दिया। हाथी का सिर लाकर गणेश जी के धड़ से जोड़कर उनमें प्राण डाल दिए गए। शिव जी ने गणेश जी को यह वरदान दिया कि किसी भी मांगलिक कार्य या पूजा से पहले उनकी पूजा की जाएगी, इसी कारण वे प्रथम पूज्य कहलाए।इस अवसर पर कथा आयोजक लल्लू राम जयसवाल, राधा देवी जयसवाल, कल्लू जयसवाल, अरविंद मौर्या, राजेश मौर्या, डॉ सत्रोहन लाल विश्वकर्मा सहित राहुल, राम बाबू, मोहित, शुभम, लक्ष्मण समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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