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बराबंकीः सिंचाई विभाग की लापरवाही से कटी पीठापुर माइनर! सैकड़ों बीघा गेहूं-सरसों जलमग्न, किसान बेहाल


सिरौलीगौसपुर/ बाराबंकी।सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही एक बार फिर किसानों पर भारी पड़ गई। पीठापुर माइनर की पटरी कट जाने से आसपास के किसानों की सैकड़ों बीघा गेहूं और सरसों की फसल जलमग्न हो गई। खेतों में पानी भरने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं और भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।शुक्रवार सुबह सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में पीठापुर माइनर कटने की जानकारी मिलते ही किसान अपने खेतों की ओर दौड़े। वहां का नजारा देखकर वे सन्न रह गए, क्योंकि बोई गई फसलें पानी में पूरी तरह डूबी हुई थीं। दर्जनों किसान खेतों को जलमग्न देखकर परेशान हो उठे। हालात से मजबूर होकर किसानों ने खुद ही माइनर की कटी पटरी को अपने हाथों से बांधने का प्रयास किया।किसानों का आरोप है कि नहर विभाग द्वारा कराई गई सफाई में मानकों की अनदेखी की गई। आधी-अधूरी और मनमानी सफाई के चलते माइनर में पानी का बहाव बाधित हुआ, जिससे दबाव बढ़ने पर पटरी कट गई। पीठापुर माइनर से जुड़े किसान सुरेंद्र कुमार, प्रेम चंद्र, सहदेव कुमार, जगतनारायण, जयनारायण और सदाशिव सहित अन्य किसानों ने चंदा इकट्ठा कर डीजल मंगवाया और पंपिंग सेट लगाकर खेतों से पानी निकालने का काम शुरू किया।किसान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि पीठापुर माइनर दर्जनों गांवों को जोड़ती है, लेकिन इसकी सफाई सिर्फ सड़क किनारे कर दी गई, जबकि बीच का हिस्सा छोड़ दिया गया। पानी छोड़े जाने पर वह आगे नहीं बढ़ पाया और पटरी कट गई, जिससे उनकी गेहूं और सरसों की फसल डूब गई। किसानों को डर है कि खेतों में पानी भरे रहने से फसल में रोग लग जाएगा और फसल पीली पड़कर बर्बाद हो सकती है।किसान सदाशिव ने बताया कि सफाई के दौरान उन्होंने पूरी नहर की साफ-सफाई कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के ‘किसानों की बात खेत पर सुनी जाएगी’ के दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। इस घटना ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और किसान मुआवजे व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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