पीलीभीत। भारत भ्रमण पर आईं एस्टोनिया की युवती पिली (च्पससल) के लिए पीलीभीत की शाम मानवता, संवेदनशीलता और भारतीय संस्कृति की जीवंत मिसाल बन गई। ग्रामीण जीवन की सादगी से लेकर शहर की इंसानियत तक, पिली ने यहां जो अपनापन पाया, वह उनके भारत प्रवास की सबसे यादगार कड़ी बन गया।
गुरुवार को पिली पीलीभीत के सिरसा सरदाह गोटिया गांव पहुंचीं, जहां उन्होंने खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन को बेहद करीब से देखा। हरे-भरे खेतों में खड़ी होकर उन्होंने गन्ना और सरसों की खेती का अवलोकन किया और किसानों से पारंपरिक व आधुनिक कृषि पद्धतियों पर बातचीत की। सरसों के लहलहाते खेतों ने उन्हें खासा प्रभावित किया, वहीं खेतों में तस्वीरें खिंचवाकर उन्होंने इस अनुभव को यादगार बताया।मजदूरों से संवाद, मुस्कान से हुआ स्वागत
गन्ने की छिलाई कर रहे मजदूरों के पास पहुंचकर पिली ने उनसे बातचीत की, हालचाल जाना और उनके साथ फोटो भी खिंचवाईं। विदेशी मेहमान की सहजता और अपनत्व ने मजदूरों के चेहरे पर भी मुस्कान बिखेर दी।
ग्रामीण परिवेश में पिली ने बथुआ का साग, फूलगोभी की सब्जी, चावल और रोटी जैसे सादे लेकिन पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद चखा। जमीन पर बैठकर ग्रामीणों के साथ भोजन करना उनके लिए नया और सुखद अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि गांव का खाना स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है।
इससे पहले, ऋषिकेश-हरिद्वार से बरेली होते हुए पीलीभीत पहुंची पिली को भाषा और जगह की अनजानियत के कारण कुछ अप्रिय अनुभव झेलने पड़े। पानी की बोतल 200 रुपये और आलू परांठा 200 रुपये जैसे अत्यधिक दाम वसूले जाने से वह परेशान हो गईं। शाम का समय और अकेलापन उनकी चिंता बढ़ा रहा था।तीन युवाओं ने दिखाया मानवता का रास्ता
इसी दौरान नरेन्द्र कुमार, योगेश कुमारी और सागर साहकृजो अपने कॉलेज, कोचिंग और जिला अस्पताल की ड्यूटी से लौट रहे थेकृने पिली को अकेला और परेशान देखा। बिना देर किए तीनों ने मानवता का परिचय दिया और उन्हें अपने साथ घर ले आए।
घर पहुंचते ही पिली के चेहरे पर सुकून साफ झलकने लगा। रात के भोजन में आलू की सब्जी, पूड़ी, दाल और दही परोसा गया, जिसे उन्होंने चाव से खाया। रात में उन्होंने एस्टोनिया में अपने परिजनों से वीडियो कॉल कर खुद को सुरक्षित बताया और भावुक होकर अपने परिवार के बारे में साझा किया।
रात्रि विश्राम के बाद सुबह सागर साह के यहां भोजन किया और गांव के खेतों का भ्रमण किया। इसके बाद पिली पीलीभीत जंक्शन से खटीमा स्थित योगा सेंटर के लिए रवाना हो गईं। विदा लेते समय उन्होंने भारतीयों की सच्ची मेहमाननवाजी और अपनत्व के लिए दिल से आभार जताया। ग्रामीणों को गर्व, संस्कृति को मिली पहचान ग्रामीणों का कहना है कि किसी विदेशी मेहमान का गांव आकर खेती और ग्रामीण जीवन को नजदीक से देखना गर्व की बात है। यह घटना न केवल इंसानियत की मिसाल है, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की वैश्विक पहचान की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देती है।
