प्रतापगढ।पूरे भारत विख्यात जनपद की पहचान बन चुके आंवला जिसे अमृत फल के रूप में भी जाना जाता है को बौद्धों की पवित्र सम्बोधि नगरी बोधगया जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था के मुख्य टेम्पल महाबोधि महाविहार परिसर में रोपित करने के साथ विभिन्न राष्ट्र के मॉनेस्ट्री के विहाराधिपतियों को भी मैत्रीपूर्ण भेंट किया गया । ज्ञातव्य है कि 2 दिसंबर से बौद्ध के कुम्भ कहे जाने वाले बौद्धों की पवित्र नगरी बोधगया में प्रारंभ होने वाले 20वें अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक संगायन जिसकी मेजबानी भारत स्वयं ने किया। जिसमें विश्व भर के बौद्ध अनुयायों के साथ पूरे विश्व के लोग इस 10 दिवसीय समागम में प्रतिभाग किया।
इसके लिए एलायंस इंटरनेशनल क्लब के अंतरराष्ट्रीय निदेशक रोशन लाल उमरवैश्य द्वारा लगभग 60 बौद्ध उपासकों व उपसिकाओं के संघ को आँवाले का पौधे को भेंट कर रवाना किया गया। उपासक संघ का नेतृत्व कर रहें राकेश कनौजिया ने बताया कि बौद्ध धर्म में इस अंवाला फल से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण कथा के अनुसार यह अमृत फल सम्राट अशोक महान द्वारा बौद्ध संघ को दिया गया अंतिम दान था, जिसका विवरण अशोकावदान में मिलता है। इसके अलावा थेरवाद बौद्ध धर्म में आंवला को बोधि प्राप्त करने के लिए इक्कीसवें बुद्ध ने इसके नीचे साधना व ज्ञान का प्राप्त किया था । जिसे भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली सम्बोधि नगरी बोधगया के मुख्य परिसर में महाबोधि महाविहार टेम्पल के विहाराधिपति भंते मनोज वी. रत्न के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय त्रिपिटक संगायन परिषद के सचिव आचार्य राजेश चंद्रा व अंतरराष्ट्रीय पत्रिका मध्यम मार्ग की सम्पादिका नीलम चंद्रा के उपस्थिति में पूज्य भंते विधिवत मंगलकामनाओ के साथ रोपित किया गया। इसके साथ विभिन्न राष्ट्रों की मोनेस्ट्री में मैत्रीपूर्ण भेंट किया गया जिसमें प्रमुख रूप से बांग्लादेश बुद्ध विहार के विहाराधिपति पूज्य भन्ते कल्याणप्रिय व अंतर्राष्ट्रीय मेडिटेशन सेंटर के प्रमुख भंते शासनपाल, म्यांमार बोधिराजा के विहाराधिपति भंते इन्दानन्दा व थाईलैंड मॉनेस्ट्री के बंचायूम बुद्ध विहार के विहाराधिपति भंते इन्दा बाबा प्रमुख है।
इस अवसर पर समन्वय संरक्षिका बहन लीलावती, अम्मा साहेब ट्रस्ट के ट्रस्टी आनंद मोहन ओझा, राजीव आर्या,दिनेश कुमार,वेदप्रकाश, सुशील कुमार ष्दद्दूष्, आचार्य उमेश, डॉ. विजय,आचार्य राजीव, मनीष रंजन, सिकंदर, आचार्य रमेश, शंभूनाथ आदि मौजूद रहें।
