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लखनऊः उत्तर प्रदेश जल निगम एकीकृत संघर्ष मोर्चा का हल्ला बोल


लखनऊ। पेंशन व वेतन का भुगतान नियमित रूप से सुनिश्चित किया जाये। क2- वेतन पुनरीक्षण दिनांक 01.01.2016 से लागू किया जाये।3000 जल निगम में कार्यरत सेवारत कर्मियों व सेवानिवृत्त पेंशनर्स की पेंशन व वेतन भुगतान को लेकर एकीकृत संघर्ष मोर्चे ने आज विशाल धरना प्रदर्शन का आयोजन लोकभवन के सामने किया, जिसमें भारी संख्या में सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भाग लिया।

उन्होंने महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एडीएम (ईस्ट) श्रीमती इन्द्र कुमार के माध्यम से प्रेषित किया।उल्लेखनीय है कि नवम्बर 2023 से ही जल निगम के लगभग 23 हजार से अधिक कर्मचारियों को वेतन और पेंशन नियमित रूप से नहीं मिल रही है तथा वर्ष 2016 में लागू सातवें वेतन आयोग के वेतन पुनरीक्षण, चयन वेतनमान तथा प्रोन्नत वेतनमान को एसीपी स्कीम के रूप में कर्मचारियों के लिए लागू नहीं किया गया है।

जबकि उत्तर प्रदेश के समस्त शासन विभागों के कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण 01.01.2016 से ही लागू है और उन्हें चयन व प्रोन्नत वेतनमान भी एसीपी के रूप में प्रदान किया जा रहा है।वर्तमान में जल निगम के अधिकारियोंध्कर्मचारियों व पेंशनर्स को वेतन व पेंशन की प्राप्ति वित्तीय वर्ष 2014-15 के स्तर पर 211ः डी.ए. पर प्राप्त हो रही है, जबकि वर्तमान में कर्मचारियों का डी.ए. 421ः हो चुका है।

इसके बावजूद जल निगम के अधिकारियोंध्कर्मचारियों व पेंशनर्स को अभी भी 211ः डी.ए. पर ही वेतन और पेंशन भुगतान किया जा रहा है, जबकि शासन द्वारा 257ः डी.ए.ध्डी.आर. स्वीकृत किया जा चुका है, अर्थात 12 वर्ष पूर्व 45ः डी.ए.ध्डी.आर. कम प्राप्त हो रहा है।मोर्चा के अध्यक्ष सैय्यद अख्तर काजमी ने कहा कि इस बात के लिए प्रदेशवासियों सहित देशवासियों को भी अवगत कराने के लिए 3000 सरकार द्वारा समस्त विभागों में लागू की गई सातवें वेतन आयोग (नगरीयध्ग्रामीण) को अभी तक लागू नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस कारण 8300 करोड़ रुपये धर्मार्थ संस्थाओं पर व्यय किए जा रहे हैं, परन्तु जल निगम के कर्मचारियों की बकाया वेतन व पेंशन का भुगतान राज्यपाल सचिवालय द्वारा किये जाने की मांग 3000 सरकार से नहीं की जा रही है।उन्होंने कहा कि जल निगम में समस्त सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मियों की वेतन पेंशन तभी सुनिश्चित होगी जब शासन द्वारा अनुमत नियुक्तियों तथा कुछ पदों को स्थायी कर दिये जायें।

मुक्त जलसंस्थान में प्रतिनियुक्ति पर प्राप्त अनुशासनिक नियुक्ति न होने के कारण उनके परिवार आर्थिक तंगी व भूखमरी का शिकार हैं।श्री शिव दत्त यादव, उपाध्यक्ष ने कहा कि एल.एन.टी.यू.डी.ओ. द्वारा वर्ष 1975 में गठित कर 3000 जल निगम बनाया गया, तब इंजीनियरों का मानदेय 22.5ः था, जिसको बढ़ाकर 10ः किया गया।

उन्होंने कहा कि अब भी जल निगम के सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मियों को 04 माह से वेतन व पेंशन का नियमित भुगतान नहीं हो रहा है, जिससे उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।मोर्चा के पदाधिकारी श्रीमती आर.पी. यादव, श्रीमती वीणा श्रीवास्तव, श्री गोरी शंकर पुजारी, मनोज कुमार, श्रीमती संगीता मिश्रा, ई. हर्ष वर्धन, ई. के.के. त्रिपाठी, श्री माया राम पटेल, श्री राम भारत मौर्य पूर्व महामंत्री सतीश शर्मा आदि ने सरकार से निवेदन किया कि जल निगम के कर्मचारियों का लंबित वेतन व पेंशन शीघ्र अति शीघ्र नियमित रूप से भुगतान किया जाये और सातवें वेतन आयोग दिनांक 01.01.2016 से लागू किया जाये, जिससे कर्मचारियों को न्याय मिल सके।


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