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बाराबंकी: वेदांत त्रिपाठी बने लेफ्टिनेंट, पूरे जिले का बढ़ाया मान


असन्द्रा/बाराबंकी । सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच भी अगर हौसले बुलंद हों तो सपने जरूर पूरे होते हैं। इसका जीवंत उदाहरण  जिले के छोटे से गांव रसूलपुर के रहने वाले वेदांत त्रिपाठी ने पेश किया है। वेदांत ने लोक सेवा आयोग की संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (सीडीएस) उत्तीर्ण कर भारतीय सेना में अधिकारी के पद पर चयनित होकर लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।ग्रामीण परिवेश में रहकर पढ़ाई करते हुए वेदांत ने सफलता का यह मुकाम आसान रास्ते से नहीं पाया। उन्होंने दर्जनों प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना किया और 14 बार एसएसबी (सर्विस सिलेक्शन बोर्ड) इंटरव्यू में सफल न हो पाने के बावजूद भी हार नहीं मानी। हर असफलता को सीख मानते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए और अंततः अपने दृढ़ संकल्प से सफलता प्राप्त की।वेदांत की लेफ्टिनेंट बनकर देशसेवा करने की जिद और जुनून ने हर बाधा को पीछे छोड़ दिया। गांव की गलियों से निकलकर सेना की वर्दी पहनने तक का सफर उनके हौसले, अनुशासन और अथक परिश्रम की कहानी कहता है। आज वेदांत क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं और यह संदेश दे रहे हैं कि सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखे और पूरे किए जा सकते हैं।वेदांत के पिता अतुल तिवारी रसूलपुर चैराहे पर सहज जनसेवा केंद्र संचालित करते हैं, जबकि उनकी माता एक निजी इंटर कॉलेज में अध्यापिका हैं। वेदांत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा-दादी, माता-पिता के मार्गदर्शन और आशीर्वाद को दिया है।पोते की सफलता पर दादा रामनरेश त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा कि वेदांत की जिद, मेहनत और कभी हार न मानने की इच्छाशक्ति ने ही यह सब संभव किया है। वेदांत की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे गांव में जश्न का माहौल है और लोग उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

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