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बाराबंकी: हड़ियाकोल आश्रम बना पीड़ितों के लिए आशा का वटवृक्ष! संत की कुटी से मिलती है आंखों की रोशनी


हंडियाकोल/बाराबंकी । बसंत ऋतु के आगमन से पूर्व आंखों की रोशनी पाने की उम्मीद लेकर प्रदेश के दूरस्थ अंचलों और पड़ोसी राज्यों से हजारों जरूरतमंद लोग प्रति वर्ष श्रीरामवन कुटीर आश्रम हड़ियाकोल पहुंचते हैं। संत की इस कुटी से रोशनी पाकर जब मरीज अपने घर लौटते हैं, तो उनके चेहरों पर विश्वास और आस्था की चमक साफ दिखाई देती है।आश्रम के सेवादार मनीष मेहरोत्रा ने बताया कि वर्ष 1981 में  जिले में गरीबों की शिक्षा और चिकित्सा की समस्या को देखते हुए मनुष्य में परमात्मा के दर्शन करने वाले, रोगहरण श्रीहनुमान जी के उपासक वीतरागी संत स्वामी रामदास  एवं स्वामी रामज्ञान दास  ने हड़ियाकोल के जंगल में सेवा रूपी एक बीज रोपा था।  46 वर्षों बाद वह सेवा एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है, जिससे लाखों पीड़ितों को जीवन की नई रोशनी मिली है।यहां केवल नेत्र रोग ही नहीं, बल्कि हार्निया, हाइड्रोसील, पाइल्स और यूट्रेस (बच्चेदानी) जैसी जटिल बीमारियों के सफल ऑपरेशन भी हजारों लोग करा चुके हैं। नेत्र ऑपरेशन के बाद जब मरीज की पट्टी खुलती है, तो सबसे पहले वे रोगहरण श्रीहनुमान जी के दर्शन कर कृतज्ञता प्रकट करते हैं।वर्तमान शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों की ओपीडी डॉ. रामेश हुड्डा एवं डॉ. उमेश सिंह खत्री (रोहतक, हरियाणा) की टीम द्वारा की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश यादव के निर्देश पर जिला कार्यक्रम अधिकारी (नेत्र) डॉ. डीके. श्रीवास्तव, वरिष्ठ नेत्र परीक्षण अधिकारी टीएन वर्मा एवं नेत्र परीक्षण अधिकारी राम अचल भी शिविर में पहुंचे। टीएन वर्मा ने बताया कि 28 दिसंबर से शुरू हुए नेत्र (मोतियाबिंद) परीक्षण में 1250 मरीजों की जांच की गई, जिनमें से लगभग 700 मरीजों के सफल ऑपरेशन डॉ. जैकब प्रभाकर (जालंधर, पंजाब) की टीम द्वारा किए जा चुके हैं। यह सिलसिला 10 जनवरी तक अनवरत जारी रहेगा।इस अवसर पर देश के प्रमुख होजरी निर्माता एवं श्रीराम वनकुटीर ट्रस्ट समिति के वरिष्ठ सदस्य शंकर लाल सोमानी अपने मित्र रामकिशन राठी एवं मालपानी जी (कलकत्ता, पश्चिम बंगाल) के साथ आश्रम पहुंचे। उन्होंने अस्पताल परिसर में स्थापित मंदिर में रोगहरण श्रीहनुमान जी, स्वामी विवेकानंद  एवं स्वामी रामदास  के चित्रों पर माल्यार्पण कर शिविर की सफलता की कामना की।सेवा का एक और भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब गोरखपुर के सेवानिवृत्त रेलकर्मी अशोक गुप्ता ऑपरेशन थियेटर के बाहर मरीजों के जूते, चप्पल और कपड़े संभालने तथा ऑपरेशन के बाद उन्हें वापस सौंपने का कार्य निस्वार्थ भाव से करते नजर आए।हड़ियाकोल स्थित श्रीरामवन कुटीर आश्रम आस्था, सेवा और मानवता का जीवंत उदाहरण बनकर हजारों पीड़ितों के जीवन में उजाला भर रहा है।

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