मसौली/बाराबंकी।ग्राम मेढ़िया स्थित रामलीला प्रांगण में आयोजित रामलीला के अंतर्गत धनुषयज्ञ एवं सीता स्वयंवर लीला का भव्य मंचन दरभंगा (बिहार) से आए कलाकारों द्वारा किया गया। कलाकारों की सजीव और प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
सीता स्वयंवर में पहुंचे रावण और बाणासुर के बीच हुए तीखे वाक् युद्ध ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया। शास्त्र ज्ञान और तर्कपूर्ण संवादों के माध्यम से बाणासुर द्वारा रावण को दिया गया उत्तर दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।
सीता के योग्य वर न मिलने पर पिता के रूप में राजा जनक के करूण विलाप ने उपस्थित जनमानस की आंखें नम कर दीं। गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान राम द्वारा जैसे ही भगवान शिव के धनुष का खंडन किया गया, पूरा प्रांगण “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।
धनुष भंग की आवाज सुनकर पहुंचे परशुराम के क्रोधपूर्ण स्वरूप ने दर्शकों को भयभीत कर दिया। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए वीर रस एवं श्रृंगार रस से ओत-प्रोत वाक् युद्ध ने माहौल को और अधिक रोमांचक बना दिया। लक्ष्मण द्वारा परशुराम के क्रोध का सामना और भगवान राम के समक्ष अनुज लक्ष्मण की रक्षा हेतु किया गया करुण विलाप दर्शकों को करुण रस में डुबो गया। मानव रूप में भगवान राम के भावों को देखकर दर्शकों को ऐसा प्रतीत हुआ मानो यह मंचन नहीं, बल्कि साक्षात् लीला घटित हो रही हो।
रामलीला आयोजन समिति की ओर से विधिवत आरती उतारी गई। इस अवसर पर ग्राम प्रधान श्रीकांत रावत, शिव कैलाश विश्वकर्मा, आशोक गुप्ता, शिव कैलाश गुप्ता, हरीश रावत, शिव विशाल वर्मा, राम सुमेर रावत, अमरपाल रावत, विजय दशरथ, सुभाषचंद्र वर्मा, उमेश चंद्र वर्मा, जगदीश प्रसाद वर्मा, श्रवण चैहान, उमाशंकर वर्मा, नोमिलाल चैहान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु व ग्रामवासी उपस्थित रहे।
