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लखनऊ: अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया


लखनऊ। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् का 17वां तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन, राजस्थान के बालोतरादृनाकोड़ा स्थित लालबाग परिसर में आयोजित किया गया । अधिवेशन में देश के सभी राज्यों से बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया।कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, भारत सरकार के वरिष्ठ विधि अधिकारी तथा कानून जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी ने बताया कि अधिवेशन का उद्घाटन सत्र माँ भारती, अधिवक्ता परिषद के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी एवं संविधान निर्माता डॉ बी आर आंबेडकर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। उद्घाटन सत्र का केंद्रीय विषय “भारतीय संविधान के 75 वर्ष रू सामाजिक समरसता” रखा गया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई, न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा था किभारत का लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक उसमें लिबर्टी, इक्वालिटी और फ्रैटरनिटीकृतीनों एक साथ मौजूद न हों।कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि बालोतरा की धरती भक्ति की भी है और शक्ति की भी। उन्होंने कवि की पंक्तियां “सोने की धरती जठे, चांदी का आसमान,रंग रंगीलो, रसभरियो मारो प्यारो राजस्थान” सुनाते हुए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अब तक 1562 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर चुकी है, जिनकी वर्तमान में कोई आवश्यकता नहीं थी, तथा हाल ही में 71 और अनुपयोगी कानूनों को भी समाप्त किया गया है। उन्होंने वकीलों को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही देश में वकीलों के लिए मेडिकल पॉलिसी लाने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा की ऐडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट भी लॉ कमीशन के पास विचाराधीन है, उसे शीघ्र पारित कराने के प्रयास किए जाएंगे।

इस अवसर पर राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। केवल राजस्थान को ही देखें तो यहां हर 20 किलोमीटर पर पगड़ी और वेशभूषा बदल जाती है। ऐसे में संविधान निर्माताओं के सामने कितनी बड़ी चुनौतियां रही होंगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का मंच अत्यंत महत्वपूर्ण है और अधिवक्ताओं को संविधान का प्रहरी एवं सिपाही बताया।भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधिवक्ता परिषद का सम्मेलन शहीदी दिवस के दिन आयोजित किया जाना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल भाषणों से नहीं आएगी, बल्कि इसके लिए धरातल पर कार्य करना होगा।कार्यक्रम में परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के. श्रीनिवास मूर्ति ने अध्यक्षीय संबोधन दिया। परिषद् की गतिविधियों पर महासचिव एवं सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता डी. भरत कुमार ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जोनल सेक्रेटरी कमल परसवाल, प्रांत सचिव श्याम पालीवाल और स्वागत समिति की ओर से प्रसिद्ध उद्योगपति रमेश मुथा ने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में राज्य के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद, अधिवक्ता परिषद् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीरा ताई, प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी, सुश्री लवी लोथा (अधिवक्ता, नागालैंड) एवं प्रांत सचिव पूनम शर्मा उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता परिषद जोधपुर हाईकोर्ट इकाई के महामंत्री देवकीनंदन व्यास एवं अधिवक्ता प्रतिष्ठा सिंहा ने किया। अंत में प्रांत अध्यक्ष सुनील जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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