नेहा पंत जोशी ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार कहानी कहने की कला नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाती है और निर्णय लेने, टीम निर्माण व जीवन कौशल को बेहतर बनाती है। उनके व्याख्यान से विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रबंधन, नेतृत्व विकास और जीवन से जुड़े अहम पहलुओं की गहरी समझ मिली।
इस अवसर पर व्यवसाय प्रबंधन विभाग की डीन डॉ. तुलिका सक्सेना एवं डॉ. विकास लम्बा ने नेहा पंत जोशी को सम्मान चिन्ह प्रदान कर उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि नेहा पंत जोशी वर्तमान में पुष्प इंस्टीट्यूट में गेस्ट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। इसके साथ ही वह मंडल के विभिन्न विद्यालयों और कॉलेजों में बच्चों के लिए थिएटर वर्कशॉप का नियमित संचालन भी करती हैं। बच्चों के साथ कार्य करने का उन्हें एक दशक से अधिक का अनुभव है।
लगभग 12 वर्षों तक दिल्ली एनसीआर में कार्य और निवास करने के बाद उन्होंने स्वच्छ वातावरण और सामाजिक जुड़ाव के उद्देश्य से अपने जन्मस्थान पीलीभीत को ही स्थायी निवास के रूप में चुना। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित नेहा पंत जोशी की लिखी और कही गई कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर “द कोच मम्मा” के नाम से व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर शिक्षाविदों और स्थानीय लोगों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे जनपद के लिए गौरव का विषय बताया है।
