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पीलीभीतः अवैध फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार! घुँघचाई पुलिस ने 59,500 रुपये नकद, मोबाइल लैपटॉप सहित भारी सामग्री बरामद की


पीलीभीत। थाना घुँघचाई पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का खुलासा कर अवैध रूप से संचालित फर्जी कॉल सेंटर को पकड़ा है। पुलिस ने मौके से गिरोह के सरगना सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 06 मोबाइल फोन, 02 लैपटॉप, नकद 59,500 रुपये, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, सिम कार्ड, विदेशी पहचान पत्र और अन्य अहम सामान बरामद हुआ है।जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि घुँघचाई क्षेत्र में “गौरव शर्मा जनसेवा केंद्रध्बीसी पॉइंट” के नाम से फर्जी गतिविधियाँ चलाई जा रही थीं। कॉल सेंटर से लोगों को ऑनलाइन गेम खिलाने के नाम पर ठगी की जाती थी। पहले गेम में जीत का लालच देकर लोगों के खातों में छोटी रकम भेजी जाती थी ताकि वे भरोसा कर लें। इसके बाद धीरे-धीरे पीड़ितों के पूरे बैंक खातों को खाली कर दिया जाता था।

पूछताछ में मुख्य सरगना अमृतपाल सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2024 में दुबई गया था। वहाँ कॉल सेंटर में काम करते समय उसने ऑनलाइन ठगी के तरीके सीखे। वापस लौटने के बाद उसने अपने दो साथियों  धर्मेंद्र कुमार और प्रियांशु दीक्षित  के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर शुरू कर दिया। वे ‘गेलमंग’ एप (एलवियर, रम्मी) के नाम पर लोगों से संपर्क कर उन्हें गेम खेलने के लिए प्रेरित करते थे और पैसा जीतने का लालच देकर जाल में फंसा लेते थे।अमृतपाल ने बताया कि धर्मेंद्र गरीब मजदूरों और भोले-भाले लोगों के बैंक खाते व मोबाइल नंबर 5 प्रतिशत कमीशन पर उपलब्ध कराता था। वहीं प्रियांशु मोबाइल की दुकानों पर सिम कार्ड जारी करते समय एक ही पहचान पत्र पर दो सिम कार्ड जारी कर लेता था और दूसरा सिम महंगे दामों पर गिरोह को बेच देता था।

पुलिस द्वारा जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इस गिरोह के बैंक खातों पर उड़ीसा, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। अब इन खातों, मोबाइल नंबरों और बरामद दस्तावेजों की गहराई से जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।मामले में थाना घुँघचाई में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने जनता को सावधान करते हुए कहा है कि सिम कार्ड खरीदते समय दो बार अंगूठा न लगवाएं और संचार साथी ऐप पर अपने आधार पर एक्टिव मोबाइल नंबरों की जांच अवश्य करें। साथ ही किसी व्यक्ति को बैंक पासबुक, सिम कार्ड या खाता विवरण देना पूरी तरह से असुरक्षित है।पुलिस के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और मामले में जांच प्रगति पर है। आज अपर पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों के समक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस वारदात का खुलासा किया।

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