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बाराबंकी: प्रखर समाजवादी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री की 39वीं पुण्यतिथि पर आयोजित हुई गोष्ठी! पीडीए के असली नेता राजनारायण थे- धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव


बाराबंकी। राजनारायण इस मुल्क के आम आवाम की आवाज थे। वह अजीवन अन्याय, जुल्म और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते रहे। आम आदमी की खातिर एक दो नहीं बल्कि 17 साल जेल में गुजार दिए और पूरे जीवन में अस्सी बार जेल गए। ऐसा कोई मुद्दा नहीं रहा आमजन से जुड़ा जिस पर राजनारायण ने आवाज न बुलंद की हो। वह सत्ता नहीं सत्याग्रह के पुजारी थे। यह बात गांधी भवन में समता ट्रस्ट ने प्रखर समाजवादी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे लोकबंधु राजनारायण की 39वीं पुण्यतिथि पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद बाजपेई ने कही। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने स्व. राजनारायण के चित्र पर मार्ल्यापण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया। वरिष्ठ लेखक, पत्रकार एवं लोकतंत्र रक्षक सेनानी धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि पीडीए के असली नेता राजनारायण थे। आज उनकी कमी समाजवादियों को महसूस हो रही है। आज सदन विचार विमुक्त हो गया है। आज आम आदमी की पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है। आज उनका हक और जमीन लूटी जा रही है, कल पानी भी लूटा जाएगा। आज जरूरत राजनारायण बनने की है तभी हम अन्याय का प्रतिकार कर सकेंगे। समता ट्रस्ट के संस्थापक एवं समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि राजनैतिक घटनाक्रम में जोसेफ स्टालिन की मौत और राजनारायण का विधानसभा से घसीटकर बाहर निकाला जाना एक ही दिन की घटना थी। राजनारयण ने जातीय आधार पर मंदिरों में प्रवेश की पाबंदी का विरोध किया और आन्दोलन चलाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ के मंदिर में दलितों को प्रवेश दिलाने और पूजा करने की लड़ाई लड़ी। श्री शर्मा ने कहा कि आपातकाल के बाद बनी यदि बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री बनाया जाता तो जनता पार्टी नहीं टूटती और आज देश की ऐसी दुर्दशा नहीं होती। वरिष्ठ पत्रकार अनिल त्रिपाठी ने कहा कि राजनारायण ने समाज में समानता और सम्पन्नता की लड़ाई लड़ी। आजादी के बाद सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए लाठियां खाई। सभा का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से समाजवादी पार्टी प्रदेश सचिव हुमायूं नईम खान, उ.प्र. कांग्रेस के पूर्व संगठन मंत्री शिवशंकर शुक्ला, भाकपा के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन, समाजसेवी विनय कुमार सिंह, शिक्षाविद अशोक शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता शऊर कामिल किदवई, जमील उर रहमान, मृत्युंजय शर्मा, इरफान हुसैन, मनीष कुमार, राजेश यादव, सत्यवान वर्मा, कलीम खान, श्रीओम सिंह, मनीेष सिंह, अंकित शर्मा, आयुष यादव, उमेश श्रीवास्तव आदि कई लोग मौजूद रहे।

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