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Sonebhadra: डीएम ने शपथ पत्र देकर बताया है कि पत्थर खदान का संचालन मानक के अनुरूप है। उसी खदान में हो गया श्रमिको की हत्या।

ऋतिशा गोंड की ओर से 268 पेज की याचिका मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स, राधे-राधे इंटरप्राइजेज, मे० साई बाबा स्टोन ,मे० कामाख्या स्टोन के विरुद्ध NGT में दाखिल की गई है।

सोनभद्र। बिरासा मुंडा की 15वीं जयंती और भाजपा का जनजातिक गौरव दिवस पर मुख्यमंत्री के उपस्थिति से महज चंद दूरी पर 15 मजदूर की पत्थर खदान धसने से मौत हो गई इसी खदान के संबंध में याचिका पर जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर बताया है कि पत्थर खदान का संचालन मानक के अनुरूप है। मजदूरों  के मौत के लिए जिलाधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं इनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए उक्त बातें याचिका कर्ता  के अधिवक्ता अभिषेक चौबे एवं विकास शाक्य ने कही। अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने कहा कि मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स की खदान 500 फीट से अधिक गहरी और खतरनाक तरीके से खड़ी है हाइट बेंच नहीं है फेरेटिक जोन के नीचे पानी निकाल कर खनन किया जा रहा है जो ई.सी. शर्तों के खिलाफ है इन्हीं विषयों पर ऋतिशा गोंड की ओर से 268 पेज की याचिका मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स  के अलावा राधे-राधे इंटरप्राइजेज मे० साई बाबा स्टोन मे० कामाख्या स्टोन के विरुद्ध NGT में दाखिल की गई है जिस पर जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर अदालत को बताया कि मैं और संयुक्त टीम द्वारा मौके की जांच करने पर मे० कृष्णा माईनिंग वर्क्स व अन्य खदान का संचालन मानक के अनुरूप पाया गया है। हादसे के बाद या पहले जिसने भी मौका देखा होगा बिल्कुल स्पष्ट है कि जिलाधिकारी ने सफेद झूठा शपथ पत्र दिया है जिसके परिणाम स्वरूप 15 मजदूरों  की मौत हो गई जिलाधिकारी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाने की मांग किया है। पर्यावरण पर काम करने वाले विकाश शाक्य एडवोकेट ने कहा कि मे० कृष्णा माईनिंग  वर्ष के संचालक मधुसूदन सिंह का बहुत नजदीकी संबंध सफेदपोश लोगों से है जिसे बाहुबली और रसुक के रूप में जनता देखती है उनका सोनभद्र और मिर्जापुर दोनों जिला पंचायत पर अदृश्य कब्जा है खनन के क्षेत्र में बाहुबलियों की  पहली एंट्री बालू की लीज में हुआ इसके बाद पत्थर खदान में भी पैठ बना लिए उनके अलावा अन्य कई सफेद पोस भी इसमें शामिल हो चुके हैं। सोनभद्र का खनन अब खून से सना हो गया है आए दिन नियमों को ताख पर रखकर खनन हो रहा है पर्यावरण को नुकसान पहुंचा या जा रहा है जिलाधिकारी ने झूठा शपथ पत्र अदालत में इसलिए भी दिया की सारे गठजोड़ एक विशेष वर्ग का है जिसमें मुख्यमंत्री का भी प्राप्त है। सफ़ेद पोश  लिखावटी कागजों मे साझेदार नहीं होते इसलिए यह मामला पीएमएलए एक्ट 2002 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर इस गठजोड़ की जांच कराई जाने की मांग किया है। खनन मामले की याचिका कर्ता  ऋतिशा गोंड ने बताया कि 12 जुलाई 2024 को सारे साक्ष्य के साथ याचिका दाखिल की गई थी और खदान को संचालन योग्य नहीं होना बताया गया था  इसके संबंध में 4 नवंबर 2024 को सभी पक्षकारों को अदालत से नोटिस भी जारी किया था परंतु जिलाअधिकारी ने जनता और अदालत दोनों को गुमराह किया और सच्चाई को छुपाया है परिणाम स्वरूप मजदूरों  की मौत हो गई। इस लड़ाई में जनता नहीं जागी तो खदान के बाहर भी पर्यावरण के संतुलन बिगड़ने से और भी बड़े तादाद में मौतें होंगे खनन हादसे में मृतक के परिजनों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा और सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग की है ।

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