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प्रतापगढः भगवान का पुस्तकावतार है श्रीमद्भागवत -मोहित जी महाराज


प्रतापगढ़। जेल रोड स्थित मोमेंटम कोचिंग क्लासेज कैम्पस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आज षष्ठम दिवस की कथा कहते हुए कथा व्यास मोहित जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री हरि अपने सभी अवतारों में मानव मात्र को संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों में जीवन जीने की कला सिखाते हैं रामावतार में भगवान श्री हरि नैतिक मूल्यों की स्थापना करते हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में रामराज्य की स्थापना करते हैं वहीं कृष्णावतार में  प्रभु बाल लीला के माध्यम से नन्द यशोदा सहित सभी गोकुल के ग्वालबालों के साथ कालिंदी के तीर पर, कालिया नाग के फन पर, ब्रज और बरसाना में महारास लीला, इंद्र का मान मर्दन करने के लिए कनिष्ठिका पर गोवर्धन पर्वत  धारण करना, कंस वध, और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह आदि घटनाओं की रचना करके गोपी ग्वाल के साथ और मथुरा द्वारिका ब्रज बरसाना में लीलापुरुषोत्तम के रूप में नित्य विहार करते हैं ! महारास लीला ,गोवर्धन पूजा ,कंस वध,महर्षि संदीपनी के आश्रम में शिक्षा, श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह जिसे भागवत केश्पंच प्राणश् भी कहा जाता है। कथा के साथ ही संगीत मण्डली बीच बीच में भजनों के माध्यम से श्रोताओं में उत्साह का संचार किया कथा के अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया 

आज की कथा में मुख्य यजमान रामचन्द्र जायसवाल ,पीयूष, कमल, रागिनी सीमा, गुड़िया सरोज,घनश्याम ,पंकज, धीरेन्द्र, अक्षत,सुभाष चन्द्र मिश्र , देवेन्द्र नाथ सत्यम मिश्र आदि की उपस्थिति रही।

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