लखनऊ/बाराबंकी। सुप्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ लोधेश्वर महादेव धाम में चल रहे सात दिवसीय महादेवा महोत्सव अब केवल आस्था का नहीं, लोगों की रोजी-रोटी और उम्मीदों का भी उत्सव बन गया है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने भावुक लहजे में कहा कि महादेवा महोत्सव ने आध्यात्मिकता के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन विकास को भी नई पहचान दी है। लाखों की संख्या में आने वाले आगंतुकों से होटलों, होम स्टे, परिवहन, भोजनालय और स्थानीय बाजारों को बड़ा लाभ मिलता है।लोधेश्वर महादेव मंदिर का प्राचीन इतिहास, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, ग्रामीण महिलाओं के हाथों की बनी बिंदी, बांसुरी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और महादेवा का प्रसिद्ध पेड़ा सब मिलकर महोत्सव को एक जीवंत ग्रामीण पर्यटन मेले में बदल देते हैं। मंत्री ने कहा कि लखनऊ से नजदीकी, बेहतर सड़क संपर्क, सुरक्षित माहौल और होम स्टे जैसी सुविधाओं ने साधारण ग्रामीण मेले को ऐसी पहचान दी है, जिस पर पूरा जिला गर्व कर सकता है।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान आसपास के होम स्टे, लोधेश्वर फार्म स्टे, मगहर झील जैसे ईको-टूरिज्म स्थल और जिले के अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों पर भी रौनक बढ़ जाती है। भोजपुरी कलाकारों, कथावाचकों, कवियों और स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां इस रंगीन माहौल में आध्यात्मिकता और मनोरंजन का अनोखा संगम रचती हैं।जयवीर सिंह ने कहा कि महादेवा महोत्सव प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। यहां आने वाला हर व्यक्ति सिर्फ दर्शन करके नहीं लौटता, वह बाराबंकी की मिट्टी, यहां की संस्कृति और यहां के लोगों से भी भावनात्मक रिश्ता जोड़कर ले जाता है।
