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बाराबंकीः आस्था का केंद्र हजरत आकिल शाह मजार, विवाद के बावजूद नहीं डिगी श्रद्धा


त्रिलोकपुर/ बाराबंकी। ग्राम तिलोकपुर में स्थित हजरत सैय्यद आकिल शाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार आज भी आस्था, विश्वास और आपसी एकता का प्रतीक बनी हुई है। यहां हर धर्म, जाति और भाषा के लोग प्रेम और श्रद्धा के साथ मत्था टेकने आते हैं।हर साल दिसंबर में लगने वाला हजरत आकिल शाह का परंपरागत उर्स और मेला पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है। आठ दिनों तक चलने वाले इस मेले में दूर-दराज से हजारों जायरीन पहुंचते हैं। मजार पर चादरपोशी, कव्वाली और दुआओं की गूंज वातावरण को रूहानी बना देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “जिसके दिल में दर्द होता है, वह यहां आता है और सुकून पाता है।हाल ही में मजार कमेटी से संबंधित आदेश पर हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने अधिवक्ता के.के. सिंह की पैरवी पर डिप्टी रजिस्ट्रार अयोध्या के आदेश पर अंतरिम स्थगन लगाया है। इसके बावजूद जायरीन की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और रोजाना बड़ी संख्या में लोग मजार पर हाजिरी देने और फातिहा पढ़ने पहुंच रहे हैं।मेला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि आगामी 9 दिसंबर से 8 दिवसीय पारंपरिक उर्स और मेला आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “मजार की रूहानियत और आस्था का रिश्ता सदियों पुराना है, यह विवादों से ऊपर है।

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