पीलीभीत। गन्ना किसानों के लिए दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में गन्ने का समर्थन मूल्य 30 रुपये प्रति कुंतल बढ़ाने की घोषणा की गई। इसी अवसर पर गन्ना विकास समिति बीसलपुर के ग्राम मलुआ में आयोजित मुख्यमंत्री गन्ना कृषक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों ने हर्षोल्लास के साथ सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अरुण मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय गन्ना उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा कि अब अगेती किस्म के गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति कुंतल, जबकि मध्यम व देर से पकने वाली किस्मों का मूल्य 390 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से गन्ने का क्षेत्रफल बढ़ेगा और किसान की आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
कार्यक्रम में उपस्थित खुशी राम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी पीलीभीत ने बताया कि जनपद में इस वर्ष गन्ने की खरीद में किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्ष 2024-25 में बीसलपुर, पीलीभीत, मझोला और पूरनपुर समितियों के माध्यम से 280.15 लाख कुंतल गन्ना खरीद की गई थी। यदि इस वर्ष भी उतनी ही मात्रा में गन्ना खरीदा गया, तो दर वृद्धि से किसानों को 84 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान होगा।
उन्होंने कहा कि यह गन्ना मूल्य सीधे किसानों के खातों में भेजा जाएगा, जिससे पारदर्शिता और ईमानदारी दोनों बनी रहेंगी।
जिला गन्ना अधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे शरदकालीन मौसम में अधिक से अधिक क्षेत्रफल में गन्ना बोएं। उन्होंने कहा कि “गन्ना एक मजबूत फसल है, जो हर मौसम में खड़ी रहती है और किसानों को स्थायी आमदनी प्रदान करती है।”प्रशिक्षण कार्यक्रम में मनोज साहू, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक बीसलपुरय बृजवीर सिंह, इफको प्रतिनिधिय श्रीराम माथुर, सर्किल गन्ना पर्यवेक्षकय नरेन्द्र गंगवार, फरीदपुर चीनी मिल प्रतिनिधिय बृजेश मिश्रा, गन्ना किसान नेताय राजेंद्र प्रसाद (डेलीगेट), रामकिशोर मौर्य, अमित कुमार, सरदार बलजीत सिंह, संजीव मिश्रा, मुन्ने हसन सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसानों ने कहा कि लंबे समय से वे गन्ने के बेहतर मूल्य की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री द्वारा 30 रुपये की बढ़ोतरी उनके जीवन में नई ऊर्जा लेकर आई है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इसे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला कदम बताया।
