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पीलीभीतः 1925 में विजयदशमी के दिन डॉक्टर केशव राम बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की वह आज बन गया वट वृक्ष! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल के सेवा कार्यों के इतिहास को रेखांकित कर रहे


पीलीभीत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक संस्था नहीं बल्कि एक विचारधारा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सन 1925 में विजयदशमी के दिन महान चिंतक डॉक्टर केशव राम बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में जिस संघ संस्था का बीज रोपित किया वह संघ परिवार 100 वर्ष के नए-नए आदर्श प्रतिमान बढ़ाने के गढने के कारण वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज वट वृक्ष बन चुका है इस वर्ष 2025 में संघ परिवार अपनी संस्था का शताब्दी वर्ष बड़े धूमधाम से मना रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा संघ परिवार के अनुसांगिक संगठनों भारतीय किसान संघ भारतीय मजदूर संघ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जन संघ विद्या भारती विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल गौ रक्षा संवर्धन परिषद अखिल भारतीय साहित्य परिषद बनवासी कल्याण आश्रम अधिवक्ता परिषद संस्कार भारती विज्ञान भारती सरीखे लगभग 50 से अधिक संगठन पूरी दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में समाजसेवी कार्य कर रहे हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनों द्वारा बीते 100 वर्षों के कार्यकाल में ऐसे कई अवसर आए जब भारत सहित दुनिया में आए चक्रवात तूफान बाढ़ महामारी भूकंप काल तथा प्राकृतिक तथा मानवीय आपदाओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के जागरूक राष्ट्र सेवा को समर्पित निष्ठावान स्वयंसेवक ने जन सेवा के कार्य करके नया इतिहास गढते हुए आदर्श पूर्ण प्रतिमान गढ़े हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक को पूरी तरह जानने व समझने के लिए संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव राम बलिराम हेडगेवार के आदर्श जीवन और चरित्र पर नजर डाली जाए तो पता लगता है कि संघ की स्थापना करने वाले डॉक्टर हेडगेवार जी का भारतवर्ष को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने में बहुत बड़ा योगदान रहा डॉक्टर हेडगेवार जी महान क्रांतिकारी थे वह अपने कालखंड में चलने वाले सामाजिक आध्यात्मिक राजनीतिक शैक्षिक आदि क्षेत्रों में चलने वाले सभी जन आंदोलन में डॉक्टर हेडगेवार जी पूरी तरह से सदैव सक्रिय रहे अंग्रेजों की गुलामी के समय भारत की स्थिति देखकर लग रहा था कि जो जोश क्रांतिकारियों में अंग्रेजों के जुल्म व अत्याचार के खिलाफ भरा हुआ था उसे देखकर लोगों को यह विश्वास हो चला था कि बहुत जल्द ही भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो सकेगा। शहीदों क्रांतिकारी व स्वयंसेवकों के बलिदान के कारण भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी प्राप्त हो गई जिसका बहुत बड़ा श्रय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को भी जाता है डॉ हेडगेवार जी ने हिंदुओं को संगठित करने की दिशा में जिस विचार के माध्यम से संघ की शुरुआत की और शाखा रूपी अनमोल राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कार्य पद्धति समाज के प्रत्येक क्षेत्र में समाज सेवा करने के लिए जो कार्य पद्धति हेडगेवार जी ने दी वो समाज सेवा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी मिसाल बन गई और स्वयंसेवक देश व समाज पर आने वाली हर विपत्ति का सामना समय पर करने लगे। संघ परिवार को तत्कालीन सरकारों का विरोध सहते हुए भी डॉक्टर हेडगेवार  जी ने बिना विचलित हुए संघ परिवार को भारत के प्रत्येक प्रदेश में स्थापित करवा दिया और उनके मार्गदर्शन में देश के स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर जन सेवा के क्षेत्र में पूरे देश में फैल गए और हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में दिन-रात जन-जन को जागरूक करने लगे डॉक्टर केश राम बलिराम हेडगेवार जी के बाद 3 जुलाई 1940 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक माधवराव सदा शिवराव गोल वर्कर जी को संघ की जिम्मेदारी मिली उन दिनों भारतवर्ष में स्वाधीनता आंदोलन उत्कर्ष पर था राष्ट्रीय विरोधी शक्तियां अंग्रेज शासको के इशारे पर भारतवर्ष के खंड-खंड करने के लिए उतारू थी श्री गुरु जी गोल वर्कर जी के आवाहन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने अपनी पूरी शक्ति व ऊर्जा संघ परिवार के संगठन विस्तार में झोंक दी अपनी जान जोखिम में डालकर साहस और राष्ट्रभक्ति के साथ सेवा करने का जो संस्कार स्वयंसेवकों के मन में रोपा गया उसकी अग्नि परीक्षा भारत विभाजन के समय हुई लाखों करोड़ों भाई बहनों भारतवासियों के जीवन व आत्मसम्मान की सुरक्षा करने का काम स्वयंसेवकों ने किया भारत के विभाजन के समय पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की रक्षा के लिए संघ परिवार के स्वयंसेवको के अलावा कोई भी बढ़कर आगे नहीं आया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पाकिस्तान से हिंदुओं को सुरक्षित निकालकर भारत लाने में अपनी वीरता और साहस के साथ कीर्तिमान स्थापित किया भारत विभाजन के समय स्वयंसेवकों के त्याग और बलिदान को देखते हुए बड़ी संख्या में लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ते चले गए सेवा भारती द्वारा भी समाज में महिलाओं के उत्थान व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मालिन बस्तियां एवं सुदूरवर्ती ग्रामीण अंचलों में महिला सिलाई केंद्र बच्चों की शिक्षा के लिए संस्कार केंद्र चिकित्सा सहायता शिविर आदि समाज सेवी कार्यो के द्वारा संघ परिवार को गांव के अंतिम छोर पर बैठे हुए व्यक्ति को भी लाभान्वित करने की दिशा में अपना योगदान दिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन समाज के हर क्षेत्र में शीर्ष स्तर का समाज सेवी संगठन है संघ परिवार के सभी अनुषंगिक संगठन स्वतंत्र स्वायत्त है सन 1975 में जब भारतवर्ष की तत्कालीन प्रधानमंत्री आयरन लेडी कहीं जाने वाली प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र का गला घोंटते हुए देश में आपातकाल लागू किया तब भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक ने आगे बढ़कर आपातकाल का पुरजोर विरोध किया और उसके खिलाफ शहर से लेकर गांव गली कूचों में आपातकाल विरोधी प्रचार प्रसार की अलख जगाई जिसके परिणाम स्वरुप आपातकाल विरोधी संघर्ष में लगभग 1 लाख से भी अधिक स्वयंसेवक आंदोलन करते हुए जेलो में बंद कर दिए गए। आज आपातकाल में बंद किए गए लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानी पेंशन उनके योगदान के लिए प्रदान की जा रही है भारत में जब भी देश व समाज पर संकट के बादल गहराते आते हैं तो स्वयंसेवकों द्वारा सेवा भाव के माध्यम से समाज के लोगों के संकटों को दूर किया जाता है यह कार्य स्वयंसेवक संघ परिवार द्वारा गुरु दक्षिणा कार्यक्रम के द्वारा जो आर्थिक सहायता स्वयंसेवकों द्वारा प्राप्त होती है उसके माध्यम से जन सेवा के कार्य स्वयंसेवकों द्वारा किए जाते हैं पीलीभीत में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन बीते कई दशकों से चलता चला आ रहा है इस समय संघ परिवार के जिला संचालक का दायित्व ओमप्रकाश गंगवार जी नगर कार्यवाहक का दायित्व डॉक्टर देवकीनंदन शर्मा भारतीय मजदूर संघ तथा सेवा भारती का विभाग दायित्व सूर्यकांत शंखधार पूर्व छात्र परिषद व गौ रक्षा संवर्धन परिषद के अध्यक्ष का दायित्व कवि एवं पत्रकार अरुण भारद्वाज एडवोकेट संस्कार भारती के अध्यक्ष का दायित्व डॉक्टर भरत कंचन निभा रहे हैं आज हर क्षेत्र में स्वयंसेवक आगे बढ़कर अपना योगदान अपना करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हिंदू राष्ट्र बनाए जाने के स्वप्न को साकार करने में अपना पूरा सहयोग कर रहे हैं वह दिन दूर नहीं है जब भारत हिंदू राष्ट्र कहलाया जाएगा और भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी होगी।

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