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लखनऊ: जांच में नहीं मिले साक्ष्य, झूठी निकली आईजीआरएस पोर्टल पर की गयी शिकायत! सीएमओ डा संतोष गुप्ता द्वारा डिप्टी सीएमओ डा अमितेश द्विवेदी को जांच सौंपी गयी थी जांच


लखीमपुर-खीरी। अवैध रूप से चिकित्सक द्वारा ब्लड निकालने के सम्बन्ध में एक शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर की गयी थी, जिसमें शिकायतकर्ता सरफुदीन द्वारा सलेमपुर कोन में संचालित चन्द्रानी हास्पिटल के चिकित्सक डा धीरेन्द्र वर्मा पर शिकायतकर्ता के पुत्र का अवैध रूप से ब्लड निकालने की बात कही गयी थी, जिसे कई समाचार पत्रो ने भी प्रकाशित किया था। इस शिकायत के संर्दभ में सीएमओ डा संतोष गुप्ता द्वारा डिप्टी सीएमओ डा अमितेश द्विवेदी  को जांच सौंपी गयी थी। साक्ष्यो व स्थलीय निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि चिकित्सक पर लगाये गये आरोप निराधार है।

सीएमओ डा संतोष गुप्ता ने बताया कि ग्राम बालूडीह पोस्ट महेवागंज थाना कोतवाली सदर निवासी सरफुदीन पुत्र स्व. तुफैल अहमद द्वारा आईजीआरएस पोर्टल संर्दभ संख्या 20015325023700 के माध्यम से शिकायत की गयी थी कि सलेमपुर कोन में स्थित चन्द्रानी हास्पिटल की ब्लड बैंक में डा धीरेन्द्र वर्मा द्वारा उसके पुत्र आरिफ का खून अवैध रूप से निकाला गया है, इसे खबर बनाकर कई समाचार पत्रो ने भी प्रकाशित किया था। शिकायत के संर्दभ में डिप्टी सीएमओ डा अमितेश द्विवेदी  को जांच अधिकारी नामित कर जांच के निर्देश दिये गये थे जांच अधिकारी द्वारा जांच उपरान्त अवगत कराया है कि उनके द्वारा 15 सितम्बर 2025 को शिकायतकर्ता के घर भौतिक निरीक्षण किया गया, जहां सरफुदीन द्वारा शिकायत के सापेक्ष कोई भी साक्ष्य अथवा अभिलेख उपलब्ध नहीं कराये गये। जिसके बाद जांच अधिकारी द्वारा चन्द्रानी हास्पिटल का निरीक्षण किया गया, चिकित्सक द्वारा बताया गया कि उनका अस्पताल वर्ष 2019 से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में पंजीकृत है। शिकायत के क्रम में बताया कि सरफुदीन का पुत्र आरिफ एक बार दिनांक 15.03.2025 को उनके अस्पताल आया था, बिना किसी दबाव स्वंय की इच्छा से रक्तदान किया था, जिसकी इन्ट्री ब्लड बैंक के डोनर रजिस्टर में अंकित है। वही अस्पताल प्रबंधन द्वारा डोनर रजिस्टर का 01.04.2024 से लेकर 15.09.2025 तक का रिकार्ड जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमे मो. आरिफ का नाम सिर्फ एक बार अंकित है। चिकित्सक ने यह भी बताया है कि वह न तो शिकायतकर्ता और न ही उसके पुत्र को व्यक्तिगत रूप से जानते है। शिकायतकर्ता द्वारा बिना किसी साक्ष्य के आरोप लगाये गये है, जो कि निराधार प्रतीत हो रहे है। जांच की आख्या साक्ष्य संकलन के साथ जिलाधिकारी महोदया को भी प्रस्तुत कर दी गयी है।

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