बाराबंकी। जूट बैगों के निर्माण और उनके बिक्री से कई महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। कर्ज लेकर समूह संचालित करने वाली दीदियों के हाथ से बने जूट उत्पादों की मांग बाराबंकी ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रांतों में भी खूब है। अब समूह संचालक शीला का नाम प्रदेश में चयनित होने वाले चार आइकान में भेजा गया है।
देवा के मुज्जफरमऊ की रहने वाली शीला देवी वर्ष 2019 से पहले गृहिणी थीं, लेकिन राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने इनके जीवन को बदलकर रख दिया। एक समूह के अध्यक्ष बनने से लेकर कंपनी की मालिक बनने का सफर तय किया। वर्तमान में जूट के उत्पाद बनाने वाली इस कंपनी में 17 समूह की 150 महिलाएं काम कर रही हैं।
यहां प्रतिमाह 10 से 15 हजार उत्पाद बनाए जाते हैं, जिसमें जूट के बोतल, बैग, फाइल फोल्डर, डायरी बैग, कैरी बैग, लैपटाप, स्कूली बैग शामिल हैं। लेडीज पर्स, बच्चों के लिए पेंसिल बाक्स, गमले, मेज कवर, पायदान, फ्रिज कवर जैसे तमाम उत्पाद बनाए जा रहे हैं।
सरकारी फोल्डर की अधिक मांग रू ब्लाक मिशन मैनेजर ममता देवी बताती हैं कि बाराबंकी, अयोध्या, सुलतानपुर, लखनऊ, हरदोई, गोंडा, उन्नाव से सबसे अधिक सरकारी प्रतिष्ठानों से जूट के फाइल फोल्डर की मांग आती है। इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, विकास भवन, ग्राम्य विकास अभिकरण आदि कार्यालयों में जूट के फाइल फोल्डर और बोतल बैग भेजे जाते हैं। इसके अलावा मुंबई, दिल्ली, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल में जूट के उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। शीला देवी बताती हैं कि 30 से 40 प्रतिशत की बचत हो जाती है। प्रति महिला 15 से 20 हजार रुपये का मुनाफा होता है। कच्चा माल कोलकाता से मंगवाया जाता है। ग्रामीण बैंक से ऋण लेकर वह समूह से जुड़ी थीं।
बीके मोहन डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि 150 महिलाएं प्रतिदिन जूट का बैग बनाकर मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, गुजरात और असम तक भिजवा रही हैं। छोटी-छोटी बचत करने वाली महिलाएं अब लाखों रुपये कमाने लगी हैं। कंपनी का नेतृत्व समूह सखी शीला कर रही हैं। शीला का नाम प्रदेश में चयनित होने वाले चार आइकान में भेजा गया है।
