शाहबाद। शनिवार को नगर शाहबाद के एक मोहल्ले में एक बारात दिल्ली से एक कार के द्वारा आई थी, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के एक मोहल्ले के एक व्यक्ति का पुत्र दिल्ली में रहता है,उसने अपनी बहन का रिश्ता किसी व्यक्ति के माध्यम से लगवाया था,उस व्यक्ति ने व्हाट्सएप के माध्यम से फोटो लड़की के भाई को भेजा भाई ने वह फोटो परिवार को भेज दिया व्हाट्सएप पर फोटो को देखकर वधू पक्ष को लड़का पसंद आ गया और शादी की तारीख तय हो गई निश्चित तिथि 13 सितंबर को बारात नगर शाहबाद के एक मोहल्ला स्थित मैरिज हॉल में आई,बारात में केवल मात्र 7 लोग आए जबकि परिजनों से बारात में 30 लोग तय हुए थे।जब दूल्हे की सूरत देखी गई तो दूल्हे की सूरत व्हाट्सएप पर भेजे गए फोटो से अलग थी, बारात में आए लोगों की संख्या तथा दूल्हा को देखकर वधू पक्ष का माथा ठनका और उन्होंने गाड़ी के ड्राइवर से जानकारी ली जानकारी लेने पर पता चला कि उपरोक्त बारात में आए सातों व्यक्ति दिल्ली के बस स्टैंड से उसकी गाड़ी में बैठे हैं, रास्ते में ही दूल्हा बनाया गया है गाड़ी वाले ने भी दूल्हे का घर नहीं देखा है, इसी बीच लोगों ने मैहर की बात की जिस पर 30000 के मेहर की बात हुई जब उनसे मैहर नगद मांगे गए तो वर पक्ष के लोगों के पास 10000 भी नहीं निकले तब वधू पक्ष के लोगों ने बारात को बिना निकाह किए ही वापस कर दिया।
अब सवाल यह था की लड़की की की शादी किस की जाए तभी किसी के द्वारा सिरौली सूचना भेजी गई सिरौली के युवक के साथ रविवार की सुबह 4रू00 बजे सिरौली के युवक के साथ लड़की की विदाई की गई यह तो खैर रही कि वधू पक्ष के लोग वक्त से जाग गए नहीं तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी और लड़की के साथ कोई दुर्घटना घट सकती थी क्योंकि वर पक्ष के लोग संदिग्ध लग रहे थे, लेकिन इतनी घटना घटने के बाद भी वधू पक्ष के लोगों ने पुलिस को बुलाना उचित नहीं समझा यदि पुलिस को बुला लिया जाता तो बारात लेकर आए सातों लोगों के बारे में जानकारी हो जातीऔर कोई बड़ा खुलासा हो सकता था।
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