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नवरात्रि के छठे दिन की जाएगी मां कात्यायनी की पूजा, जानिए मंत्र, आरती


मां दुर्गा की छठी विभूति हैं मां कात्यायनी। नवरात्र में षष्ठी तिथि को मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा का विधान है। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक, षष्ठी देवी को भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री माना गया है। जो भक्त दुर्गा मां की छठी विभूति कात्यायनी की आराधना करते हैं मां उन पर सदैव अपना आशीर्वाद बनाए रखती हैं।

षष्ठी देवी मां को ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में स्थानीय भाषा में छठ मैया कहते हैं। देवी मां की आराधना करने वाले भक्तों पर वह अपनी कृपा बनाए रखती हैं और उन्हें सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।

शारदीय नवरात्रि 2025 की षष्ठी तिथि 27 तारीख को दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से शुरू हो जाएगी और 28 तारीख को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। ऐसे में माता कात्यायनी की पूजा 28 सितंबर को की जाएगी। ऐसे में हम देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी के बारे में आपको बता रहे हैं। दरअसल, ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण देवी मां को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। मां दुर्गा का ये स्वरूप अत्यन्त ही दिव्य है।

मां कात्यायनी का रंग सोने के समान चमकीला है, तो इनकी चार भुजाओं में से ऊपरी बाएं हाथ में तलवार और निचले बाएं हाथ में कमल का फूल है। जबकि, इनका ऊपर वाला दायां हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे का दायां हाथ वरदमुद्रा में है। कहते हैं मां कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति को किसी प्रकार का भय या डर नहीं रहता और उसे किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ता।

सबसे बड़ी बात देवी मां की उपासना उन लोगों के लिए बेहद ही लाभकारी है, जो बहुत समय से अपने लिये या अपने बच्चों के लिये शादी का रिश्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई अच्छा रिश्ता नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अगर आप भी इस तरह की समस्याओं से परेशान हैं, तो आज मां कात्यायनी की उपासना करके आपको लाभ जरूर उठाना चाहिए। पूजा के दौरान माता के इस मन्त्र का जप करें।
मां कात्यायनी के मंत्र:

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके,

शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।

"कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।"

मंत्र - 'ॐ ह्रीं नम:।।'
चन्द्रहासोज्जवलकराशाईलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।

मंत्र - ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
मां कात्यायनी का भोग:

मां कात्यायनी को शहद या शहद से बनी खीर का भोग अर्पित किया जाता है।
मां कात्यायनी शुभ रंग:

माता कात्यायनी को पीला रंग बेहद प्रिय है।
मां कात्यायनी की आरती:

जय जय अंबे जय कात्यायनी ।
जय जगमाता जग की महारानी ।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा ।।

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।।

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की ।।

झूठे मोह से छुड़ानेवाली।
अपना नाम जपानेवाली।।

बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।।

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी ।।

जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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