बाराबंकी। 44 साल पुराने संजय सेतु ने एक बार फिर अपनी जर्जर हालत से हजारों लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सोमवार को पुल के बीचो-बीच अप्रोच में गहरी दरार उभर आई। दरार इतनी चैड़ी हो गई है कि नीचे बह रही शरीर नदी का पानी साफ दिखाई देने लगा। लोहे की पटरी टूट चुकी है और बड़े वाहनों के गुजरते ही पुल जोर-जोर से हिलने लगता है। कई जगह नट-बोल्ट बाहर निकल आए हैं। हालात ऐसे हैं कि अगर तुरंत मरम्मत न हुई तो कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
स्थानीय लोगों की मानें तो संजय सेतु पर आए दिन मरम्मत कार्य होता है, लेकिन स्थायी समाधान न मिलने से समस्या जस की तस बनी रहती है। मरम्मत के दौरान घंटों जाम लगना यात्रियों की परेशानी और बढ़ा देता है। लोगों का कहना है ,सरकार ने नया पुल बनाने की घोषणा तो की, पर अभी तक धरातल पर काम शुरू न होना हमारी सबसे बड़ी पीड़ा है।
यह सेतु सिर्फ बाराबंकी और बहराइच जनपदों को ही नहीं, बल्कि नेपाल से आने-जाने वाले हजारों वाहनों के लिए भी जीवन रेखा है। रोजाना छोटी-बड़ी गाड़ियों का दबाव इतना अधिक है कि पुल का बोझ और बढ़ता जा रहा है। हर दिन लोग भय के साए में इस पुल को पार करने को मजबूर हैं।राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पीडी सौरभ ने बताया कि फिलहाल पुल की मरम्मत कराई जाएगी और नया पुल भी स्वीकृत हो चुका है। योजना तैयार की जा रही है। मगर लोगों का कहना है कि “योजना और कागजी कार्रवाई से जानें सुरक्षित नहीं होंगी, जरूरत है कि काम तुरंत शुरू हो।आज संजय सेतु के नीचे सिर्फ शरीर नदी का जल नहीं बह रहा, बल्कि हजारों यात्रियों की जिंदगी भी हर रोज मौत के मुहाने से होकर गुजर रही है।
