बाराबंकी। बेटे का शव देख पिता तड़प रहा था, कलेजा मानो छलनी हो रहा हो, आंसुओं की धार रुकने का नाम नहीं ले रही थी। परिवारजन की चीखों का यह दृश्य हर किसी को झकझोर रहा था। दुर्घटना में युवक की मौत से सारे अंग बेकार हो चुके थे, सिवाय आंख के, इतने में केजीएमयू की चिकित्सकों की टीम ने स्वजनों को आंख दान करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि पिता को दुख तो बहुत हुआ, लेकिन इस उम्मीद से अपने दिल पर पत्थर रख लिया कि उसके बेटे की आंखें जिंदा हैं, कोई देख भी सकेगा।
चिनहट-देवा मार्ग पर 23 सितंबर की सुबह लखनऊ जाते समय तेज रफ्तार डीसीएम ने मुरादाबाद मजरे माती निवासी पिता-पुत्र की बाइक को टक्कर मार दी थी। यह घटना लखनऊ के चिनहट के पास हुई थी। विनय अपने पिता के साथ लखनऊ में रह कर कपड़े धोने और प्रेस करने का काम करते थे। बाइक सवार विनय कनौजिया और पिता रामू कनौजिया घायल हो गए। दोनों को ट्रामा सेंटर लखनऊ लाया गया, जहां पुत्र की मौत हो गई।
घायल अवस्थी में पुत्र की मौत की जानकारी पर पिता तड़प उठा। विनय के चाचा बंसीलाल, चचेरा भाई अनुराग, छोटा भाई शिवम, ममेरा भाई नीरज के अलावा तमाम परिजन थे।
छोटे भाई शिवम ने बताया कि केजीएमयू की चिकित्सकों की टीम आई और बताया कि हादसा इतना जबरदस्त था कि विनय के सारे अंग बेकार हो चुके हैं, उसकी आंखें सही सलामत हैं। यदि आंख दान कर सकते तो किसी के जीवन में रोशनी आ जाएगी। यह निर्णय लेना पिता के लिए आसान नहीं था, लेकिन इस उम्मीद के साथ हामी भर दी कि उसके बेटे की आंखों से कोई देख सकेगा। परिवारजन के चार लोगों ने शपथ पत्र देकर सहमति जताई और विनय के शव का पोस्टमार्टम हुआ।
विनय को लगाई गई आर्टिफिशियल आइ रू 18 वर्षीय विनय के मामा का पुत्र नीरज ने बताया कि केजीएमयू में विनय की आंख निकालकर सुरक्षित रख दिया गया है, जब किसी को जरूरत पड़ेगी, तब आंख का इस्तेमाल किया जाएगा। कोलकाता से आर्टिफिशियल आइ (कृत्रिम आंख) मंगाई गई थी। शव के पोस्टमार्टम के बाद एआइ लगाई गई, ताकि शव का पूरा सम्मान मिले, क्षति-विक्षत न दिखे। कृत्रिम अंग लगाकर उसे माती गांव लाया गया है।
पूरे परिवार का होगा इलाज रू नेत्र दान देने के बाद केजीएमयू में कभी भी और किसी भी दिन परिवार का कोई सदस्य इलाज या स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आता है, तो उसका मुफ्त इलाज होगा। जल्द ही प्रमाण पत्र जारी कर केजीएमयू परिवारजन को सौंपेगा।
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