लखनऊ । अलीगढ़ स उत्तर प्रदेश के हृदय रोग विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि दिल की सेहत की शुरुआत अस्पतालों से नहीं, बल्कि रसोई से होती है। जैसे-जैसे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ शहरों से लेकर कस्बों तक बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे यह साफ हो गया है कि पोषण ही वह सबसे बड़ा कारक है जो तय करता है कि इंसान स्वस्थ रहेगा या हृदय रोग का शिकार बनेगा। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक इलाज आपातकालीन स्थिति में जान बचा सकता है, लेकिन असली फर्क रोज की थाली में रखे खाने से पड़ता है।अलीगढ़ और प्रदेश के अन्य हिस्सों में खाने की आदतों में तेज बदलाव आया है। घर का सादा और संतुलित भोजन धीरे-धीरे तली-भुनी चीजों, परिष्कृत आटे और चावल, मीठी मिठाइयों, पैकेट वाले पेय और नमक से भरे अचार से बदलता जा रहा है। यह भोजन भले ही स्वादिष्ट और परंपरा से जुड़ा हुआ लगे, लेकिन चुपचाप रक्तचाप बढ़ा रहा है, कोलेस्ट्रॉल को असंतुलित कर रहा है और मोटापा व मधुमेह जैसी समस्याओं को जन्म दे रहा है। ये सभी मिलकर हृदय रोग की बड़ी वजह बन रहे हैं।
डॉ. अथर कमाल, डीएम कार्डियोलॉजी, कमाल हार्ट केयर सेंटर, अलीगढ़, चेतावनी देते हैंरू “हमें यह समझना होगा कि हमारे हर निवाले का असर या तो शरीर को मजबूत करने वाला होता है या नुकसान पहुँचाने वाला। पोषण इलाज का दूसरा कदम नहीं है, यह तो सबसे पहली सुरक्षा है। मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें, साबुत अनाज और मेवों से भरी थाली एक ऐसी प्राकृतिक दवा है जो धमनियों को साफ और दिल को मजबूत रखती है। लेकिन उत्तर प्रदेश में अब भी यह गलतफहमी है कि भारी-भरकम और तैलीय भोजन ताकत का प्रतीक है। यह सोच खतरनाक है। असली ताकत संतुलन में है कृ कम नमक, कम चीनी, कम तली चीजें और ज्यादा ताजा, घर का बना भोजन। अगर परिवार समय रहते ये आदतें अपनाएँ तो दिल का दौरा, स्ट्रोक और दूसरी बीमारियों का खतरा बहुत हद तक घटाया जा सकता है और जीवन लंबा, सक्रिय और स्वस्थ बनाया जा सकता है।”विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण आधारित रोकथाम सबसे किफायती और असरदार उपाय है, खासकर ऐसे प्रदेश में जहाँ बड़े शहरों के बाहर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ अभी भी सीमित हैं। छोटे-छोटे बदलाव कृ जैसे पकौड़ी की जगह भुने हुए स्नैक्स चुनना, स्वाद के लिए ज्यादा नमक की बजाय नींबू और हर्ब्स का इस्तेमाल करना, या पॉलिश्ड चावल की जगह मोटे अनाज खाना कृ दिल की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।चिंता की बात यह भी है कि अब युवा पीढ़ी भी उच्च रक्तचाप और समय से पहले हृदय रोग का शिकार हो रही है। लंबे समय तक बैठे रहना, तनाव, अनियमित जीवनशैली और फास्ट फूड तक आसान पहुँच इस संकट को और गहरा बना रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि जब तक पोषण को हृदय स्वास्थ्य की नींव नहीं माना जाएगा, तब तक समय से पहले मौतें और परिवारों पर बढ़ता बोझ रुक नहीं पाएगा।
