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बाराबंकीः अफसरों की मिलीभगत से एसआरएमयू ने हड़पी करोड़ों की सरकारी जमीन


बाराबंकी। चिनहट-देवा रोड स्थित श्रीरामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (एसआरएमयू) का बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। तहसीलदार नवाबगंज भूपेंद्र विक्रम सिंह की कोर्ट ने खुलासा किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अफसरों की मिलीभगत से करीब 5580 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। कब्जाई गई जमीन में सार्वजनिक नाली, तालाब और नवीन परती की भूमि शामिल है, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।कोर्ट ने आदेश दिया है कि एसआरएमयू कब्जाई गई जमीन को तुरंत खाली करे और करीब 28 लाख रुपये जुर्माना अदा करे। यदि 30 दिनों के भीतर जमीन खाली नहीं की गई तो प्रशासन जबरन बेदखल कार्रवाई करेगा।गौरतलब है कि यह आदेश उस समय सार्वजनिक किया गया जब एबीवीपी के छात्रों पर हुए लाठीचार्ज में 25 से अधिक पदाधिकारी घायल हो गए और विरोध तेज हो गया।तहसीलदार की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने 17 मई 2025 को दर्ज रिपोर्ट के बावजूद हड़ौरी ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जा जमाए रखा। इसमें सार्वजनिक नाली (0.2750 हेक्टेअर), तालाब (0.2300 हेक्टेअर) और नवीन परती (0.0830 हेक्टेअर) की जमीन शामिल है। जिम्मेदारी विश्वविद्यालय के संचालक पंकज अग्रवाल पर तय की गई है।जानकारी के मुताबिक, बड़े संस्थानों की स्थापना के दौरान नाली, तालाब और परती भूमि का विनिमय (एक्सचेंज) किया जाता है। लेकिन एसआरएमयू ने अधिकारियों की मिलीभगत से बिना विनिमय के ही यह जमीन दबा ली।तहसीलदार भूपेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि संस्थान को नोटिस जारी किया गया है और जल्द ही कब्जाई गई जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया पूरी होगी। 

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