रामनगर/ बाराबंकी। घाघरा नदी का कहर सरसंडा गाँव पर टूट पड़ा है। तेज कटान से अब तक 9 परिवारों के आशियाने नदी में समा चुके हैं। इनमें 6 झोपड़ियाँ और 3 पक्के मकान शामिल हैं। सबसे अधिक तबाही फाजिलपुर और पूरनपुर मजरे में हुई है, जहाँ लोग अपने खेत और घर उजड़ने के डर से सहमे हुए हैं।बेघर परिवार खुले आसमान तले रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की आँखों में अपने उजड़े घरों और डूबते खेतों का दर्द साफ झलक रहा है।स्थिति की गंभीरता देखते हुए एसडीएम गुंजिता अग्रवाल और तहसीलदार विपुल सिंह ने मौके पर पहुँचकर हालात का जायजा लिया। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि हर पीड़ित को राहत सामग्री और सुरक्षित ठहराव की सुविधा दी जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ा तो आने वाले दिनों में और भी परिवारों का सब कुछ बह जाएगा। गाँव के लोग भविष्य की अनिश्चितता और कटान के खौफ से डरे हुए हैं।
बाराबंकीः घाघरा की कटान से उजड़े 9 आशियाने ,फाजिलपुर-पूरणपुर में स्थितियां नाजुक
September 25, 2025
रामनगर/ बाराबंकी। घाघरा नदी का कहर सरसंडा गाँव पर टूट पड़ा है। तेज कटान से अब तक 9 परिवारों के आशियाने नदी में समा चुके हैं। इनमें 6 झोपड़ियाँ और 3 पक्के मकान शामिल हैं। सबसे अधिक तबाही फाजिलपुर और पूरनपुर मजरे में हुई है, जहाँ लोग अपने खेत और घर उजड़ने के डर से सहमे हुए हैं।बेघर परिवार खुले आसमान तले रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की आँखों में अपने उजड़े घरों और डूबते खेतों का दर्द साफ झलक रहा है।स्थिति की गंभीरता देखते हुए एसडीएम गुंजिता अग्रवाल और तहसीलदार विपुल सिंह ने मौके पर पहुँचकर हालात का जायजा लिया। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि हर पीड़ित को राहत सामग्री और सुरक्षित ठहराव की सुविधा दी जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ा तो आने वाले दिनों में और भी परिवारों का सब कुछ बह जाएगा। गाँव के लोग भविष्य की अनिश्चितता और कटान के खौफ से डरे हुए हैं।
