बाराबंकी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक शिक्षक के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है। जिले में ऐसे लगभग 3500 शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2010 से पहले की है। इस वर्ष के बाद से टीईटी व्यवस्था लागू कर दी गई थी, उससे पहले वाले बिना टीईटी के शिक्षक थे। हालांकि, अधिकारी शासन के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उसी के मुताबिक आगे की कार्यवाही की जाएगी।
शिक्षा का अधिकारी अधिनियम (आरटीई) 2010 लागू हुआ था। आरटीई के तहत टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास कर ही अध्यापक बनने की शर्तें लागू कर दी गई थीं, तब से लेकर अब तक सिर्फ शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर ही भर्ती हो रही है। अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वर्ष 2010 के पहले वाले शिक्षकों में खलबली मचा दी है। मसौली के रामसजीवन वर्मा, दिनेश चंद्र, रामनगर के आरके सिंह, जहांगीराबाद के पंकज सिंह ने बताया कि उनकी नौकरी समाप्ति की ओर है, 50 तो किसी के 52 वर्ष आयु हो रही है। अब पात्रता शिक्षक परीक्षा कैसे देंगे, यह चुनौती है। हालांकि, कुछ शिक्षक साथ फिर से कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं, इस आदेश से एक बड़ी संख्या प्रभावित हो सकती है।
जिले के 2318 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 8500 से अधिक शिक्षक हैं, जिसमें वर्ष 2010 से पहले वाले करीब 3500 अध्यापक हैं। कोर्ट ने इन शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है। टीईटी पास करने के लिए दो वर्ष का समय दिया गया है।
संतोष देव पांडेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करने को अनिवार्य कर दिया है। आदेश का इंतजार किया जा रहा है, शासन से आदेश मिलते ही कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
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