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लेह-लद्दाख हिंसा को लेकर कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने दिया बयान, कहा- 1947 से ही लद्दाख के लोग पूरी तरह से भारत समर्थक रहे हैं और उन्होंने जरूरत पड़ने पर हमेशा सुरक्षा बलों की मदद की है


लेह-लद्दाख में कल हुए बवाल के बाद हालात तनावपूर्ण लेकिन शांत है। लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां सड़कों पर तैनात हैं। इस बीच हिंसा पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता कर्ण सिंह की तरफ से बयान सामने आया है। कर्ण सिंह ने कहा, ''मैं लद्दाख में हाल की अशांति से बहुत परेशान हूं, जिसके परिणामस्वरूप 4 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। 1947 से ही लद्दाख के लोग पूरी तरह से भारत समर्थक रहे हैं और उन्होंने जरूरत पड़ने पर हमेशा सुरक्षा बलों की मदद की है।''

आगे उन्होंने कहा, ''ऐसा लगता है कि लद्दाख के युवाओं में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि उनके रोजगार के अवसर खत्म होते नजर आ रहे हैं। एक बात तो यह है कि अब उनके पास लोक सेवा आयोग नहीं है जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। संविधान की छठी अनुसूची जैसी किसी चीज में शामिल करना एक अत्यंत उचित समाधान प्रतीत होता है।''

साथ ही उन्होंने अधिकारियों से युवाओं की मांग पर अपील की है। कांग्रेस नेता ने कहा, ''मैं अधिकारियों से अपील करूंगा कि वे युवाओं की मांगों पर सावधानीपूर्वक विचार करें और देखें कि संवैधानिक सुरक्षा उपायों सहित उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए क्या ठोस उपाय किए जा सकते हैं। आंदोलन को बढ़ने से रोकने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। मैं लोगों से शांत रहने और शांतिपूर्वक अपनी मांगें रखने की भी अपील करता हूं।''

वहीं, आपको बता दें कि गृह मंत्रालय ने लद्दाख में हुई हिंसा के लिए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि सोनम वांगचुक ने भीड़ को अपने भड़काऊ बयानों से उकसाया। कई नेताओं द्वारा भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करने के बावजूद, सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखा। उन्होंने अरब स्प्रिंग स्टाइल में विरोध प्रदर्शन के उत्तेजक बयान दिए। साथ ही नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का हवाला दिया। इसी के बाद भीड़ ने अनशन स्थल से निकलकर बीजेपी कार्यालय और सीईसी लेह के सरकारी कार्यालय पर हमला किया।

हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने लोगों से शांति की अपील की है। साथ ही हालात दोबारा से खराब ना हो इसके लिए लद्दाख के साथ-साथ करगिल में BNS की धारा 163 लागू कर दी गई है। अब बिना प्रशासन की इजाजत के कोई भी जुलूस, रैली या मार्च नहीं निकाल सकेगा। CRPF की चार एडिशनल कंपनियों को कश्मीर से लद्दाख भेजा गया है। इसके अलावा आईटीबीपी की चार और कंपनियों को भी लद्दाख भेजा जा रहा है। साथ ही लोगों से पुराने और भड़काऊ वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर ना करने की अपील की गई है।

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