मिर्जापुर। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी के वैज्ञानिकों द्वारा गोरखपुर जिले के ग्राम कुशम्ही निवासी प्रगतिशील किसान संजय कुमार सिंह को ग्राफ्टिंग तकनीक पर आधारित 1000 ग्राफ्टेड ब्रिमैटो के पौधों का वितरण किया गया। यह वितरण उत्तर प्रदेश कृषि शोध परिषद (न्च्ब्।त्), लखनऊ की परियोजना के अंतर्गत किया गया,जिसका उद्देश्य सब्जी उत्पादन में नवीन तकनीकों को बढ़ावा देना एवं किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है। संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में ग्राफ्टिंग तकनीक को भारतीय कृषि में अपनाने के लिए विभिन्न शोध व प्रयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्राफ्टिंग तकनीक न केवल सब्जी फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि यह मृदा जनित बीमारियों से भी प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे किसानों को कीटनाशकों पर होने वाले खर्च में भी कमी आती है। इस अवसर पर सब्जी उत्पादन विभाग के विभागाध्यक्ष एवं उपकार परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ.अनंत बहादुर ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने विस्तार से बताया कि ग्राफ्टिंग तकनीक के माध्यम से सब्जी उत्पादन में उद्यमिता के नए द्वार खुल सकते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से टमाटर, बैंगन व अन्य सोलानेसी कुल की फसलों में उपयोगी सिद्ध हो रही है। डॉ. बहादुर ने किसानों से आह्वान किया कि वे इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाएं और इसे गांव-गांव तक पहुँचाकर कृषि आधारित आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएं।
कार्यक्रम के दौरान शोधकर्ता अनीष कुमार सिंह, अनूप प्रताप सिंह एवं नीतीश सिंह भी उपस्थित रहे, जिन्होंने किसानों को ग्राफ्टिंग तकनीक की बारीकियों, पौधों की देखभाल तथा व्यावसायिक उत्पादन से जुड़ी अहम जानकारियाँ दीं। किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे एक लाभकारी कदम बताया और संस्थान द्वारा दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन को भविष्य की खेती में उपयोगी बताया।
