पुलिस विभाग में आरक्षी नागरिक पुलिस के पद पर सीधी भर्ती 2023 में आरक्षण का लाभ लेने के लिए फर्जी जाती, निवास लगाया गया था।
सोनभद्र। थाना घोरावल, पर उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में आरक्षी नागरिक पुलिस के पद पर सीधी भर्ती 2023 में उत्तर प्रदेश के फर्जी निवास एवं अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेकर आरक्षी पद पर भर्ती होने में सफलता प्राप्त करने वालों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया। पुलिस अधीक्षक सोनभद के पत्र संख्याः प-197/2023, दिनांक : 24 अगस्त 2025 पर पृष्ठांकित प्रभारी निरीक्षक घोरावल जिला सोनभद्र के आदेश कि एसआई रामजान सिंह यादव कृपया जांच कर आख्या दें पर मुझ एसआई द्वारा जांच की गई तो पाया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में आरक्षी नागरिक पुलिस के पद पर सीधी भर्ती 2023 के अंतर्गत निम्नलिखित अभ्यर्थीगण द्वारा उनके सम्मुख अंकित पते का निवासी होना अंकित करते हुए जनपद सोनभद्र उत्तर प्रदेश में स्थानीय स्तर से निर्गत अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर भर्ती में आरक्षण का लाभ प्राप्त कर चयनित होने एवं सत्यापन/जांच से उनके द्वारा आवेदन पत्र में अंकित तथ्य गलत पाए अभ्यर्थी 1- उमेश कुमार वैश्य पुत्र रमाशंकर वैश्य, पंजीकरण संख्या 11510362, अनुक्रमांक 4742059 ने अपने आवेदन पत्र में पत्राचार व स्थानीय पता के कलम में ग्राम दीवा, पोस्ट घोरावल जनपद सोनभद्र उत्तर प्रदेश द्वारा श्रेणी में एससी अंकित करते हुए तहसीलदार घोरावल जनपद सोनभद्र द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र आवेदन क्र 232000030013186, प्रमाण पत्र क्रमांक 7012340000945 दिनांक 26.2.2023 संलग्न किया गया है। सत्यापन/जांच की कार्रवाई के दौरान पाया गया कि यह अभ्यर्थी मूल रूप से ग्राम मझिगवा थाना गढ़वा तहसील चितरंगी जनपद सिंगरौली मध्य प्रदेश का निवासी पाया गया जो बैसवार जाति का है। यहां उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश राज्य में बैसवार/बैस्य अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद भी वास्तविक तथ्यों को छिपाकर उत्तर प्रदेश राज्य का निवासी होना दर्शात हुए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। इसी प्रकार दूसरा अभ्यर्थी (2):- विजय कुमार पुत्र नर्मदा प्रसाद पंजीकरण संख्या 11508343, अनुक्रमांक 4796649 ने अपने आवेदन पत्र में पत्राचार व स्थानीय पता के कलम में ग्राम बर पोस्ट शिवद्वार घोरावल जनपद सोनभद्र दर्शाया है एवं जाति प्रमाण पत्र आवेदन क्रमांक 212000030093285 प्रमाण पत्र क्रमांक 701214006866 दिनांक 16/8/2021 संलग्न किया गया है। सत्यापन जांच के दौरान यह पाया गया कि अभ्यर्थी मूल रूप से ग्राम तमई पोस्टदार थाना गढ़वा तहसील चितरंगी जनपद सिंगरौली मध्य प्रदेश का निवासी है जो बैसवार जाति का है। मध्य प्रदेश राज्य में वह अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद भी वास्तविक तत्वों को छुपा कर उत्तर प्रदेश का निवासी होना दर्शाते हुए एससी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। इसी प्रकार अभ्यर्थी (3):- राकेश सिंह वैस पुत्र श्रीपाल सिंह, पंजीकरण संख्या 1349 5965 अनुक्रमांक 4849822 ने अपने आवेदन पत्र में पत्राचार व स्थानीय पता के कालम में ग्राम चिंगोरी पोस्ट लिलवाही घोरावल जनपद सोनभद्र उत्तर प्रदेश तथा श्रेणी में एससी अंकित करते हुए तहसीलदार घोरावल जनपद सोनभद्र द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र आवेदन क्रमांक 222000030014362 प्रमाण पत्र क्रमांक 701224001051 दिनांक 25.2.2022 संलग्न किया गया है। सत्यापन /जांच से पाया गया कि यह अभ्यर्थी मूल रूप से ग्राम पोड़ी बरगवां थाना बरगवां तहसील दुधमनिया जनपद सिंगरौली मध्य प्रदेश का निवासी है जो बैसवार जाति का है तथा मध्य प्रदेश राज्य में वह अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद भी वास्तविक तत्वों को छुपा कर उत्तर प्रदेश राज्य का निवासी होना दशति हुए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। इसी प्रकार अभ्यर्थी (4):- दीपक कुमार वैश पुत्र श्यामलाल पंजीकरण संख्या 11750752 अनुक्रमांक 5735813 ने अपने आवेदन पत्र में पत्राचार व स्थानीय पता के कालम में ग्राम चिंगोरी पोस्ट लिलवाही घोरावल जनपद सोनभद्र उत्तर प्रदेश तथा श्रेणी में एससी अंकित करते हुए उप जिलाधिकारी घोरावल जनपद सोनभद्र द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र आवेदन क्रमांक 212000020051815 प्रमाण पत्र क्रमांक 701212007922 दिनांक 12.4. 2021 संलग्न किया गया है। सत्यापन/जांच के दौरान पाया गया कि यह व्यक्ति मूल रूप से ग्राम व पोस्ट पछुआर व तहसील देवसर जनपद सिंगरौली मध्य प्रदेश का निवासी है, जो बैसवार जाति का है जो मध्य प्रदेश राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद भी वास्तविक तथ्य को छुपा कर उत्तर प्रदेश राज्य का निवासी होना दर्शाते हुए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। इस प्रकार स्पष्ट है कि इन अभ्यर्थियों द्वारा जनपद सोनभद्र उत्तर प्रदेश राज्य का कूट रचित ढंग से निवासी बनकर गलत व फर्जी तथ्य प्रस्तुत कर अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र असल के रूप में इस्तेमाल कर/संलग्न कर आरक्षण का लाभ प्राप्त कर उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी के पद पर चयन पाने में सफलता प्राप्त की गई है। इनका यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता के अधीन अपराध की परिधि में आता है।
