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राखी पूर्णिमा या श्रावण पूर्णिमा की पूजन विधि और शुभ मुहूर्त


सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है इसलिए राखी पूर्णिमा भी इस दिन को कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही महादेव की पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है। साल 2025 में सावन पूर्णिमा का त्योहार 9 अगस्त को है। इस दिन आपको कैसे पूजा करनी चाहिए और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा आइए जानते हैं।

सावन पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 2 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मूहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 53 मिनट तक होगा। ऐसे में पूर्णिमा के दिन सुबह के समय 5 बजे से लेकर 9 बजे के बीच पूजन कर सकते हैं। वहीं इस दिन सूर्यास्त 7 बजकर 6 मिनट पर होगा। इसलिए प्रदोष काल की पूजा आप 7 बजकर 10 मिनट से शुरू कर सकते हैं।
सावन पूर्णिमा पूजा विधि
सावन पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर आपका स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को भी साफ करना चाहिए। अगर व्रत रखने वाले हैं तो सबसे पहले पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प आपको लेना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा आपको करनी चाहिए। इस दौरान आप विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, विष्णु मंत्रों का जप कर सकते हैं। सावन पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा भी की जाती है इसलिए शिव भगवान के मंत्रों का जप और शिव चालीसा का पाठ करना भी आपके लिए शुभ रहेगा। अंत में विष्णु भगवान और शिव जी की आरती आपको करनी चाहिए।
सावन पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देना भी अतिशुभ होता है। ऐसा करने से चंद्र दोष से आपको मुक्ति मिलती है। 9 अगस्त को चंद्रोदय शाम 7 बजकर 21 मिनट पर होगा। इसलिए चंद्र पूजन और चंद्रमा को अर्घ्य आप इस समय दे सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में चंद्र ग्रह मजबूत होता है और आपको कई शुभ लाभ प्राप्त होते हैं।

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