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बाराबंकीःसूख रही जलधार से सिसकती नदी के पुनर्जीवित होने की आस! मनरेगा, बाढ़ खंड से मिलेगा नदी का मूल स्वरूप, लाखों किसानों को होगा फायदा, कल्याणी या रेठ नदी के पुनर्जीवन से बहेगी जलधार, फिर लौटेगा मूलस्वरूप


बाराबंकी। क्या आपने कभी किसी सूखी नदी का क्रंदन सुना है। नहीं सुना, तो उसके तट पर जाकर महसूस कीजिए। वजह पूछने पर प्रत्युत्तर में कहेगी, ‘मैं सिर्फ श्रद्धा से नहीं, गहरे प्यार से बच सकती हूं’ ऐसी ही छोटी नदियां है कल्याणी और रेठ। सूख रही जलधार से सिसकती नदी के अब पुनर्जीवित होने की आस बंधी है। राज्य सरकार की पहल पर ‘एक जनपद, एक नदियां’ अंतर्गत जिला प्रशासन इन नदियों में एक का चयन कर रही है।

शासन के निर्देश पर विलुप्त हो रहीं नदियों को पुनर्जीवन मिलेगा। नदियों को अतिक्रमण मुक्त कर मनरेगा व बाढ़ खंड के माध्यम से जीर्णोद्वार किया जाएगा। हजारों मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने के साथ ही जलधारा को पुनर्जीवित किया जाएगा। जिले में रेठ और कल्याण नदियों में से एक का चयन होना है, जिसका कायाकल्प होगा।

एक और जल प्रवाह फिर से जागृत होगी। नदी किनारे पौधारोपण व जैव विविधता को बढ़ावा देने जैसे कदमों से संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सशक्त होगा। यह अभियान केवल भूगर्भ जलस्तर सुधारने या सिंचाई की सुविधा तक सीमित नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और प्रकृति का संरक्षण है।

सीतापुर के धन्नाग सरोवर से निकलकर अयोध्या तक जाने वाली करीब 173 किलोमीटर लंबी कल्याणी नदी दम तोड़ रही है। जिला प्रशासन ने पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए वर्ष 2020 में मनरेगा से नदी का कायाकल्प करने की शुरुआत की थी। लाकडाउन के दौरान हजारों श्रमिकों को काम भी मिला, जिसका जिक्र पीएम मोदी ने अपनी मन की बात किया था। निंदूरा, समरदा, मवैया, विशुनपुर क्षेत्र में करीब 10 किलो मीटर तक कल्याणी नदी साफ हुई थी, इसके बाद प्रोजेक्ट बंद हो गया। आज भी नदी पर सैकड़ों स्थानों पर अतिक्रमण है। निंदूरा, अटहरा, भड़ार, बजगहनी, देवरा सहित कई गांवों में नदी को पाटकर खेती करते हैं। वहीं, फतेहपुर के विशुनपुर से रामसनेहीघाट के कई जगहों पर अतिक्रमण है, रेत से नदी पट है, गंदगी की भरमार है। सोते बंद हो चुके हैं। नदी सूख रही है।

रेठ नदी सीतापुर से निकलती है और करीब 109 किलोमीटर लंबी है। यह नदी बाराबंकी शहर के बीच से बहती है और इस पर कई पुल बने हुए हैं। रेठ नदी के किनारे अतिक्रमण की वजह से जलभराव की समस्या रहती है। लखनऊ-महमूदाबाद रोड पर कुर्सी के निकट औद्योगिक क्षेत्र में रेठ नदी को पाटकर पक्के नाला बना दिया गया। रेठ नदी के जीव-जन्तु विलुप्त हो गए। पशुओं को पीने लायक पानी भी नसीब नहीं है। बैना टिकरहार, चिलहेटी, उमरा, अमरसंडा, सतरखि क्षेत्र और नगर पालिका परिषद नवाबगंज में स्थित नदी पर अतिक्रमण है।

अन्ना सुधन, मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि रेठ और कल्याण नदी को चिह्नित किया गया है, इसमें से एक नदी का चयन कर कायाकल्प कराया जाएगा। इससे पहले कार्ययोजना बनाने का कार्य बाढ खंड के अधिशाषी अभियंता करेंगे।

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