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आवारा कुत्ते को बचाने के चक्कर में गई महिला दरोगा की जान, सिर पर गंभीर चोट लगने से मौत


उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक आवारा कुत्ते को बचाने के चक्कर में दरोगा की मौत हो गई। कवि नगर थाने में तैनात महिला दरोगा ऋचा सचान देर रात अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने रूम लौट रही थीं। शास्त्री नगर में काटे चौक पर अचानक एक आवारा कुत्ता उनकी गाड़ी के सामने आ गया। कुत्ते को बचाने के चक्कर में रिचा ने बाइक को मोड़ा तभी सामने से एक कार आ गई। ऋचा की बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। ऋचा बाइक से नीचे गिर गईं और दूर तक सड़क पर घिसटती हुई चली गईं।

सड़क हादसे में ऋचा के शरीर पर कई जगह चोटें आईं। उनके सिर पर गंभीर चोटें आई, जिसके चलते ऋचा की मौत हो गई। मूल रूप से कानपुर की रहने वाली ऋचा सचान 2023 बैच की दरोगा थीं। इस हादसे की सूचना जैसे ही ऋचा के परिजनों को मिली, वह गाजियाबाद पहुंचे। ऋचा के पिता से जब हमने बात की तो उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनकी बेटी के साथ यह हादसा हुआ है।

ऋचा के पिता ने बताया कि अब से कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपनी बेटी से बातचीत की थी और उसका हाल-चाल जाना था और उनकी बेटी ने कहा था कि सब कुछ अच्छा है। ऋचा के भाई ने बताया कि अचानक कुत्ता सामने आ गया जिसके चलते बाइक गिर गई।

11 अगस्त 2025 को, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने और उन्हें शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह फैसला स्वत: संज्ञान लेते हुए दिया, जिसमें कहा गया कि 6-8 हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम्स में रखा जाए और उन्हें सड़कों पर वापस न छोड़ा जाए। कोर्ट ने कुत्तों के काटने और रेबीज से होने वाली मौतों को गंभीर खतरा मानते हुए यह आदेश दिया। साथ ही, एक हेल्पलाइन स्थापित करने और इस प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है।

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