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लखनऊ: वायरल हेपेटाइटिस बी एवं सी लीवर सिरोसिस और कैंसर का है बडा कारण मुख्य चिकित्सा अधिकारी ! जिला चिकित्सालय में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर आयोजित हुई गोष्ठी


लखीमपुर खीरी। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध जिला चिकित्सालय मोतीपुर ओयल खीरी में विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमएस डॉ आरके कोली ने की। कार्यक्रम में बतौर अतिथि प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ वाणी गुप्ता व सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता मौजूद रहे। संगोष्ठी में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को हेपेटाइटिस बी व सी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी।

सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस बी व सी के लक्षण आमतौर में समान होते हैं, जिनमें थकान, बुखार, पेटदर्द, भूंख न लगना, पीलिया, गहरे रंग का मूत्र व उल्टी शामिल हैं। हेपेटाइटिस बी के संक्रमण लम्बे समय तक रहने वाले संक्रमण से लीवर को क्षति हो सकती है, हेपेटाइटिस बी का टीका उपलब्ध है। यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन, संक्रमित सुई व संक्रमित उपकरणों से, असुरक्षित यौन संबंधों से, मां से गर्भस्थ बच्चों में हो सकता है। वहीं हेपेटाइटिस सी के लक्षण बी के समान हो सकते हैं लम्बे समय तक रहने वाले संक्रमण से लीवर में क्षति, सिरोसिस और यकृत कैंसर हो सकता है। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सीएमएस डॉ आरके कोली ने बताया कि हेपेटाइटिस बी सिरेंज और इन्फेक्शन को एक से अधिक व्यक्ति पर उपयोग करने, टैटू बनवाने और शरीर में छेद करवाने, माँ से बच्चे में हो सकता है। इससे बचने के लिये जानकारी और उचित संसाधनों का प्रयोग करना चाहिये, जैसे इन्जेकशन लगवाते समय यह ध्यान रखना की उसका उपयोग दोबारा तो नही हो रहा है, टैटू व शरीर में छेद करवाते समय उपकरणों के सेनेटाइजेशन आदि शामिल हैं। एसीएमओ डॉ रवी मोहन गुप्ता ने बताया कि हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाकर इनसे बचा जा सकता है, बच्चोें के लिये सभी सरकारी अस्पतालों में टीके निःशुल्क उपलब्ध हैं। डॉ शिशिर पाण्डेय ने बताया कि हेपेटाइटिस बी व सी सबसे खतरनाक है और इससे लीवर कैंसर या फेलियर भी हो सकता है, हेपेटाइटिस बी का टीका उपलब्ध है और नवजात शिशु को जन्म के 24 घंण्टे के अन्दर दिया जाता है। हेपेटाइटिस सी का इलाज सम्भव है, परन्तु इसका टीका अभी उपलब्ध नही है। इस दौरान डॉ एसके मिश्रा, डॉ केके आदिम, डॉ दिनेश पुष्कर, डॉ पीके रावत, डॉ शिखर बाजपेई, डॉ रचित मिश्रा, डॉ सैय्यद रजा, डॉ पूनम, काउन्सलर देवनन्दन श्रीवास्तव, नीरज कुमार, रवी श्रीवास्तव, आलोक कुमार, पंकज षुक्ला, सुरेन्द्र कष्यप, अनुज त्रीवेदी सहित अन्य अधिकारीध्कर्मचारी सम्मिलित रहे।सीएमएस डॉ आरके कोली ने बताया कि जिला चिकित्सालय में हेपेटाइटिस की जाँच व उपचार विगत 6 माह से प्रारम्भ है। चिकित्सालय मे अब तक हेपेटाइटिस बी के 69 मरीज इलाज प्राप्त कर रहें हैं। वही हेपेटाइटिस सी के 32 मरीज पता चले हैं, जिसमें 22 का इलाज पूरा हो चुका है।

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